
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की सियासी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को दीदी को उस समय एक और तगड़ा झटका लगा, जब उनकी बेहद करीबी और पार्टी की सबसे वरिष्ठ चेहरों में से एक, सांसद काकोली घोष ने टीएमसी से अपने सभी पदों को अलविदा कह दिया। काकोली घोष के इस फैसले ने चुनावी हार के दर्द से जूझ रही टीएमसी के भीतर एक बड़े विद्रोह के संकेत दे दिए हैं।
चार दशकों की वफादारी का मिला ये सिला? छलका था काकोली का दर्द
काकोली घोष पिछले कई दशकों से ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही हैं। वे लोकसभा में लगभग 9-10 महीनों तक टीएमसी की चीफ व्हिप (मुख्य सचेतक) की भूमिका निभा रही थीं। लेकिन हाल ही में ममता बनर्जी ने उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए उनकी जगह कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बना दिया था।
पार्टी के इस फैसले से काकोली घोष बेहद आहत थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था, “1976 से जुड़ाव, 1984 में सफर शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफ़ादारी का इनाम मिला है।” इस भावुक और तीखे पोस्ट के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही ममता का साथ छोड़ सकती हैं।
शुभेंदु अधिकारी की बैठक में एंट्री और केंद्र से मिली ‘Y’ कैटेगरी सुरक्षा
काकोली घोष के इस्तीफे की पटकथा पिछले कुछ दिनों से लगातार लिखी जा रही थी। हाल ही में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद जहां अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं की सुरक्षा में कटौती की थी, वहीं काकोली घोष की सुरक्षा को अपग्रेड करते हुए ‘वाई’ (Y) कैटेगरी की सिक्योरिटी दे दी थी।
इसके बाद सियासी पारा तब और चढ़ गया जब मंगलवार को कल्याणी में पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में काकोली घोष टीएमसी के छह अन्य विधायकों के साथ शामिल होने पहुंच गईं। इस बैठक में शामिल होने से पहले उन्होंने टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था और अपने त्यागपत्र में चुनावी रणनीतिकार संस्था ‘आईपैक’ (I-PAC) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
इन विधायकों ने भी बढ़ाई ममता बनर्जी की धड़कनें
शुभेंदु अधिकारी की इस अहम बैठक में केवल बारासात की सांसद काकोली घोष ही नहीं, बल्कि टीएमसी के कई अन्य कद्दावर विधायक भी मौजूद थे। बैठक में हिस्सा लेने वालों में शामिल थे:
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अनीसुर रहमान बिस्वास (विधायक, देगंगा)
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बीना मंडल (विधायक, स्वरूपनगर)
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मोहम्मद अब्दुल मतीन (विधायक, हारोआ)
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बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य टीएमसी विधायक
एक साथ इतने जनप्रतिधियों का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पाले में खड़ा दिखना ममता बनर्जी के लिए आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है।
भाजपा सांसद का बड़ा दावा: ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी TMC!
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सौमित्र खान ने एक सनसनीखेज दावा करके बंगाल की राजनीति में खलबली मचा दी है। सौमित्र खान ने बुधवार को कहा कि विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष है।
“TMC के करीब 50 विधायक और 20 सांसद इस समय पार्टी नेतृत्व से बुरी तरह नाराज हैं। वे सभी पाला बदलने के लिए तैयार बैठे हैं। अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सिर्फ एक बार हरी झंडी दे दे, तो तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। सभी नेता भाजपा में शामिल होना चाहते हैं।”
सौमित्र खान, भाजपा सांसद
काकोली घोष का इस्तीफा और टीएमसी के भीतर मची यह उथल-पुथल साफ इशारा कर रही है कि ममता बनर्जी के लिए अपनी पार्टी के कुनबे को बिखरने से बचाना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
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