
भारतीय राजनीति में इस समय एक बेहद दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल लगातार तीखे हमले बोलकर केंद्र की मोदी सरकार को घेरने और असहज करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के ही वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। शशि थरूर कई मौकों पर सरकार के फैसलों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश में हो रहे अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) की जांच के लिए एक हाई-प्रोफाइल समिति का गठन किया गया है। पूरी कांग्रेस पार्टी जहां इस पर मौन है, वहीं शशि थरूर ने खुलकर इस फैसले का स्वागत किया है।
थरूर ने फैसले को बताया महत्वपूर्ण, लेकिन जताई एक बड़ी आशंका
इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार के फैसले को कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से इसका समर्थन कर दिया है। एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल से विशेष बातचीत के दौरान थरूर ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। एक देश के तौर पर हमें यह गहराई से समझना होगा कि हम इस समय किन बदलावों से गुजर रहे हैं। धरातल पर कई तरह की चीजें हो रही हैं। हालांकि, मुझे यह भी लगता है कि हमें इस फैसले के राजनीतिक प्रभाव पर भी गंभीरता से बात करनी होगी।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस सांसद ने सरकार को एक बड़ी नसीहत और चेतावनी भी दे डाली। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह समिति बिल्कुल सटीक और सही आंकड़े उपलब्ध कराए। अगर आंकड़े अधूरे या त्रुटिपूर्ण हुए, तो लोग इसका गलत इस्तेमाल (दुरुपयोग) कर सकते हैं, जिससे देश में एक नया विवाद भी खड़ा हो सकता है।”
गृहमंत्री अमित शाह ने किया था इस विशेष समिति का एलान
आपको बता दें कि शशि थरूर का यह बयान गृहमंत्री अमित शाह के उस बड़े एलान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देश में हो रहे ‘अस्वाभाविक जन सांख्यिकीय परिवर्तन’ की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की बात कही थी। सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए अमित शाह ने लिखा था, “घुसपैठ और अन्य बाहरी कारणों की वजह से होने वाला अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी देश के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को लाल किले से समिति बनाने का एलान किया था, जिसे अब सरकार ने अमलीजामा पहनाते हुए स्थापित कर दिया है।”
जानिए कौन-कौन है इस हाई-प्रोफाइल समिति में शामिल?
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस समिति की कमान बेहद मजबूत हाथों में सौंपी गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके अलावा इस टीम में देश के कई दिग्गज नाम शामिल हैं:
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जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर (पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट) – अध्यक्ष
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दुर्गा शंकर मिश्रा (पूर्व IAS अधिकारी) – सदस्य
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बालाजी श्रीवास्तव (पूर्व IPS अधिकारी) – सदस्य
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शामिका रवि (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री) – सदस्य
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भारत के जनगणना आयुक्त – सदस्य
सीमाई इलाकों में डेमोग्राफी का मुद्दा और भाजपा का रुख
भारतीय जनता पार्टी (BJP) काफी लंबे समय से देश के सीमावर्ती राज्यों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन और डेमोग्राफी में बदलाव के मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कई बार सार्वजनिक मंचों से दावा कर चुके हैं कि बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ ने असम की डेमोग्राफी को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। उनका कहना है कि अगर घुसपैठ की यही रफ्तार रही, तो असमिया मूल के लोग अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक बन जाएंगे।
यह समस्या सिर्फ असम तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बसने के कारण स्थानीय जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है। भाजपा पूर्वोत्तर के राज्यों में इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ती आई है। हालिया समय में असम और पश्चिम बंगाल में अपनी रणनीतियों को धार देते हुए भाजपा सरकारों ने घुसपैठियों के खिलाफ अपने अभियानों को और ज्यादा तेज कर दिया है। ऐसे में विपक्षी खेमे से शशि थरूर का इस समिति को सही ठहराना एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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