मुख्यमंत्री बनते ही एक्शन मोड में थलपति विजय, दिल्ली में पीएम मोदी से होगी पहली मुलाकात

तमिलनाडु की सत्ता में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का पहला आधिकारिक दिल्ली दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बुधवार को होने वाली यह यात्रा न केवल उनके नेतृत्व की परीक्षा है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच नए संबंधों की शुरुआत भी मानी जा रही है। अपनी पहली दिल्ली यात्रा के दौरान सीएम विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। उनके इस दौरे पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं कि क्या वह दिल्ली से तमिलनाडु के लिए कोई विशेष ‘विकास पैकेज’ लेकर लौटेंगे।

केंद्र के साथ विकास का ‘ब्लूप्रिंट’ और वित्तीय सहायता पर जोर

बतौर मुख्यमंत्री अपनी पहली दिल्ली यात्रा को विजय बेहद रणनीतिक रूप से देख रहे हैं। राज्य में नई विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए उनके ऊपर भारी दबाव है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम विजय केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु में बुनियादी ढांचे के विकास, नई औद्योगिक परियोजनाओं और विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के लिए भारी वित्तीय सहायता की मांग रख सकते हैं। राज्य के विकास के लिए केंद्र की मंजूरी और सहयोग उनके इस दौरे का मुख्य एजेंडा है। इसके साथ ही, विजय दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में स्थापित महान तमिल कवि तिरुवल्लूवर की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह आयोजन तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करने के उनके विजन को दर्शाता है।

अभिनेता से मुख्यमंत्री तक का संघर्षपूर्ण सफर

सिनेमा के ‘थलपति’ से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने तक का विजय का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। राज्य में दशकों से जमे-जमाए द्रविड़ राजनीति के दिग्गजों, डीएमके और एआईडीएमके के एकाधिकार को तोड़ना एक बड़ी चुनौती थी। विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलझा वेत्री कड़गम’ (TVK) के जरिए जनता के मुद्दों को केंद्र में रखा और जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बनाई। इस यात्रा में उन्हें भारी विरोध और अपनी रैली में हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, जहां पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, इन तमाम बाधाओं के बावजूद विजय ने जनता के बीच अपनी पैठ बनाए रखी और अंततः सत्ता की दहलीज तक पहुंचे।

राजनीतिक गठबंधन और अकेले दम पर जीत की कहानी

विजय की राजनीति का एक अहम पहलू उनकी स्वतंत्र छवि है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह डीएमके, एआईडीएमके या भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन कांग्रेस ने अपने पुराने साथी डीएमके के साथ जाने का निर्णय लिया। इसके बाद विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के दम पर चुनावी मैदान में उतरने का साहसिक फैसला लिया, जो उनके लिए बेहद सफल साबित हुआ। फिलहाल, सीएम विजय का यह दिल्ली दौरा तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य और केंद्र के साथ उनके तालमेल की दिशा तय करने वाला साबित होगा।