
LPG Gas Cylinder New Rules: देश के करोड़ों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी गैस की आपूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से ऐसे सभी घरों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर रीफिल कराने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जहां पहले से ही पीएनजी (PNG) यानी पाइप वाली रसोई गैस का कनेक्शन मौजूद है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और लगातार गहरे होते जा रहे भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है, इसी के मद्देनजर यह सख्त फैसला लिया गया है।
सरकार की तरफ से जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, जिन भी ग्राहकों के घरों में पीएनजी का इस्तेमाल शुरू हो चुका है, उन्हें अब अगले 30 दिनों के भीतर अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन या तो सरेंडर करना होगा या फिर भविष्य के लिए एक ‘ट्रांसफर वाउचर’ लेना होगा।
मार्च के नियम को और किया सख्त, 30 दिन की मिली मोहलत
आपको बता दें कि सरकार का यह नया और कड़ा आदेश इस साल मार्च महीने में जारी किए गए उस पुराने निर्देश के बाद आया है, जिसमें पीएनजी उपभोक्ताओं को तीन महीने के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ने के लिए कहा गया था। लेकिन अब सरकार ने नियमों को और ज्यादा सख्त कर दिया है। अब साफ कर दिया गया है कि पीएनजी कनेक्शन चालू होते ही ग्राहक एलपीजी सिलेंडर की नई बुकिंग नहीं करा सकेंगे।
दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी की आशंकाओं के कारण वहां से होने वाले वैश्विक तेल और गैस आयात पर काफी बुरा असर पड़ा है। यही वजह है कि भारत में एलपीजी की सप्लाई चेन पर लगातार दबाव देखा जा रहा था और सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
ट्रांसफर वाले कर्मचारियों, छात्रों और किराएदारों को मिलेगी बड़ी राहत
हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस नए नियम को लागू करते समय आम जनता और कामकाजी वर्ग की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा है। मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जो ग्राहक पीएनजी पर शिफ्ट हो रहे हैं, वे अपनी गैस एजेंसी से एक विशेष ‘ट्रांसफर वाउचर’ प्राप्त कर सकते हैं।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि भविष्य में वे किसी ऐसे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की पाइपलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो वे इसी ट्रांसफर वाउचर को दिखाकर अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन बिना किसी परेशानी के दोबारा चालू करवा सकेंगे। सरकार के इस संवेदनशील फैसले से उन नौकरीपेशा कर्मचारियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जिनका अक्सर ट्रांसफर होता रहता है। साथ ही, शहरों में रहने वाले किराएदारों, पढ़ाई करने वाले छात्रों और प्रवासियों के लिए भी यह व्यवस्था बेहद मददगार साबित होने वाली है।
देश में सालाना 33 मिलियन टन की खपत, अब नए देशों से आयात शुरू
भारत में रसोई गैस की मांग बहुत बड़ी है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 33 मिलियन टन एलपीजी की भारी-भरकम खपत होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी हिस्सा पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) से इंपोर्ट यानी आयात करता है, इसलिए वहां छिड़ी जंग ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया था।
लेकिन स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने अब अमेरिका, कनाडा और नॉर्वे जैसे दूसरे सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी ईंधन का आयात करना तेजी से शुरू कर दिया है। मंत्रालय ने देश के उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव के बावजूद घरेलू मोर्चे पर आम जनता को एलपीजी की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महज चार दिनों के भीतर ही देश में 1.66 करोड़ सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले रिकॉर्ड 1.72 करोड़ सिलेंडरों की सफल डिलीवरी की जा चुकी है।
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