
लोकसभा चुनाव के खत्म होते ही आम जनता की जेब पर महंगाई का भारी बोझ पड़ना शुरू हो गया है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले महज 12 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल करीब 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इस तेजी के कारण देश के लगभग सभी राज्यों में पेट्रोल का भाव ₹100 प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि कई राज्यों में डीजल भी सेंचुरी (₹100 के पार) लगा चुका है।
आपको बता दें कि मार्च 2024 से देश में तेल की कीमतें स्थिर थीं और चुनाव से ठीक पहले सरकार ने पेट्रोल-डीजल में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। लेकिन अब मई 2026 के महीने में जनता को बैक-टू-बैक महंगाई के झटके लग रहे हैं।
मई महीने में चौथी बड़ी बढ़ोतरी
ईंधन की कीमतों में इस महीने (मई 2026) यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है। तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 को पेट्रोल की कीमतों में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया है।
पिछले 12 दिनों का रिपोर्ट कार्ड:
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25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा हुआ।
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23 मई: पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ।
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19 मई: पेट्रोल-डीजल के दामों में औसतन 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई।
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15 मई: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ था।
देश के प्रमुख राज्यों में पेट्रोल की नई कीमतें (प्रति लीटर)
लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में 1 लीटर पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं:
उत्तराखंड में पेट्रोल ₹100.96, झारखंड में ₹107.02, पंजाब में ₹105.90, गुजरात में ₹102.92 और हरियाणा में ₹103.57 प्रति लीटर पर बिक रहा है।)
इन राज्यों में डीजल भी हुआ ₹100 के पार
पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतों ने भी आम आदमी और ट्रांसपोर्टर्स का बजट बिगाड़ दिया है। mypetrolprice के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई शहरों में डीजल ₹100 प्रति लीटर के पार बिक रहा है।
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आंध्र प्रदेश में डीजल की कीमत ₹105.92 प्रति लीटर हो गई है।
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बिहार के अररिया, औरंगाबाद, बांका और भागलपुर जैसे जिलों में डीजल ₹100 के पार निकल चुका है।
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गुजरात के राजकोट में भी डीजल का भाव ₹100.01 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
आखिर अचानक क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
वैश्विक स्तर पर चल रहे ईरान युद्ध (Iran War) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसकी वजह से भारत की सरकारी तेल कंपनियों (Indian Oil, BPCL, HPCL) को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
₹30,000 करोड़ का नुकसान: पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में दाम न बढ़ाए जाने के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का बड़ा घाटा हो रहा था। इसी घाटे की भरपाई के लिए अब कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है।
चुनाव से पहले सरकार ने ऐसे रोके थे दाम
लोकसभा चुनाव से पहले कीमतों को स्थिर रखने और जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली स्पेशल एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) में ₹10-10 प्रति लीटर की भारी कटौती की थी।
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पेट्रोल पर ड्यूटी: ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई थी। (कुल एक्साइज ड्यूटी ₹21.90 से घटकर ₹11.90 रह गई थी)।
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डीजल पर ड्यूटी: ₹10 से घटाकर शून्य (0) कर दी गई थी। (कुल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 प्रति लीटर पर आ गई थी)।
इसी कटौती के कारण पिछले कई महीनों से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और कंपनियों के घाटे के कारण अब कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।
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