
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी शिकस्त और सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की बगावत अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। फलता जैसे अपने मजबूत गढ़ में मिली ऐतिहासिक हार से सहमी टीएमसी को अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक झटका लगा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार के गठन के बीच, ममता बनर्जी की बेहद भरोसेमंद और बारासात से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं, सियासी गलियारों में खबर तेज है कि वह जल्द ही लोकसभा की सदस्यता (सांसद पद) से भी इस्तीफा दे सकती हैं।
बेटे का बड़ा बयान– ‘नौकरी और राशन घोटाले से परिवार की छवि हुई खराब’
काकोली घोष दस्तीदार के इस आत्मघाती कदम के पीछे की इनसाइड स्टोरी उनके बेटे वैद्यनाथ घोष ने बयां की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैद्यनाथ ने साफ कहा कि उनकी मां ने टीएमसी के जिला पदाधिकारी और महिला मोर्चा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और वह सांसद पद भी छोड़ सकती हैं। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी सरकार के दौरान हुए अनगिनत स्कैंडल्स और घोटालों ने उनके शिक्षित और सम्मानित परिवार की सामाजिक छवि को मटियामेट कर दिया है।
‘कब तक बर्दाश्त करें भ्रष्टाचार?’ आरजी कर कांड का भी किया जिक्र
ममता बनर्जी और अपनी मां के दशकों पुराने पारिवारिक रिश्तों पर बात करते हुए वैद्यनाथ ने कहा, “वह आज भी ममता बनर्जी के करीब हैं, लेकिन कोई भ्रष्टाचार को कब तक बर्दाश्त कर सकता है? पार्थ चटर्जी के कार्यकाल में खुलेआम नौकरियां बेची गईं, जिससे राज्य के लाखों पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हो गए। ज्योतिप्रिय मल्लिक को राशन घोटाले में जेल जाना पड़ा। इसके बाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल वाली शर्मनाक घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इन सब पापों का नुकसान हमें और हमारे जैसे सम्मानित नेताओं को समाज में उठाना पड़ रहा है। लोग अब हम पर भी उंगलियां उठाने लगे हैं। सिर्फ व्यक्तिगत रिश्तों की वजह से मेरी मां अब तक चुप थीं, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।”
हार की जिम्मेदारी या टीएमसी लीडरशिप से नाराजगी?
आधिकारिक तौर पर काकोली घोष दस्तीदार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे अपने त्यागपत्र में बारासात और उत्तरी 24 परगना जिले में पार्टी के बेहद खराब चुनावी प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी ली है। गौरतलब है कि बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी छह सीटें बुरी तरह हार गई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस इस्तीफे की पटकथा कुछ दिन पहले ही लिख दी गई थी, जब लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से काकोली को हटाकर वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी।
क्या बीजेपी में शामिल होंगी काकोली घोष? गृह मंत्रालय ने दी वाई श्रेणी की सुरक्षा
TMC के पदों से इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा काकोली घोष दस्तीदार को अचानक ‘वाई’ (Y) श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराए जाने से बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। क्या वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने जा रही हैं? इस सवाल पर उनके बेटे ने स्पष्ट किया, “यह मामला बीजेपी में शामिल होने का नहीं है। मेरी मां बस एक कड़ा स्टैंड ले रही हैं कि वह इस संस्थागत भ्रष्टाचार का हिस्सा बनकर आगे नहीं रह सकतीं। उन्हें इस सड़ चुके सिस्टम के खिलाफ आवाज उठानी ही थी, और उन्होंने वही किया।”
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