
Strait of Hormuz US Iran tensions 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच भले ही युद्ध समाप्त होने की खबरें आ रही हों, लेकिन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर तनाव अभी भी पूरी तरह थमा नहीं है। दोनों देशों की ओर से की गई आंशिक नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर और कमर्शियल जहाज इस रास्ते से गुजरने से लगातार कतरा रहे हैं।
Zee News के अनुसार, इस कड़े गतिरोध के बीच जिब्राल्टर के तट पर ब्रिटेन का अत्याधुनिक युद्धपोत RFA लाइम बे (RFA Lyme Bay) लंगर डाले खड़ा है। यह विशाल जहाज होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई समुद्री माइंस (underwater explosives) को पूरी तरह साफ करने के एक बेहद जटिल और बड़े मिशन की तैयारी कर रहा है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों (NATO) पर कड़ा आरोप लगाया था कि वे ईरान के खिलाफ इस वैश्विक संकट में अमेरिका की पर्याप्त सैन्य मदद नहीं कर रहे हैं।
‘मदरशिप’ की तरह काम करेगा घातक तकनीकों से लैस यह जहाज
राष्ट्रपति ट्रंप के उस कड़े बयान के बाद, जिसमें उन्होंने नाटो सहयोगियों से तंज कसते हुए कहा था कि “वे अपना तेल खुद लाएं और अपने समुद्री रास्तों की सुरक्षा खुद करें”, ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर एक संभावित अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन की कमान संभालने का फैसला किया है।
जिब्राल्टर के तट पर खड़ा ब्रिटिश युद्धपोत RFA लाइम बे कोई साधारण जहाज नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से पूरी तरह लैस है:
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समुद्री सोनार और ड्रोन: इस जहाज पर पानी के नीचे छिपे बारूद का पता लगाने वाले आधुनिक सोनार और हाई-टेक सी-ड्रोन तैनात किए गए हैं।
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मदरशिप की भूमिका: यह जहाज एक ‘मदरशिप’ की तरह काम करेगा, जो खुद संभावित माइंस वाले इलाके से सुरक्षित दूरी पर रहेगा और वहाँ से रिमोट कंट्रोल के जरिए ड्रोन और रोबोटिक वाहनों को समुद्र के भीतर भेजेगा ताकि इंसानी जान को खतरा न हो।
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आगे का रूट: यह जहाज बहुत जल्द जिब्राल्टर से अपनी यात्रा शुरू करेगा और स्वेज नहर (Suez Canal) के रास्ते होते हुए सीधे फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में प्रवेश करेगा। हालांकि, ब्रिटेन और फ्रांस इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम शांति समझौता होने के बाद ही करेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड: वैश्विक व्यापार पर पड़ा कड़ा असर
फारस की खाड़ी में प्रवेश करने से पहले RFA लाइम बे हवा से मिलने वाली सुरक्षा (Air Support) के लिए ब्रिटेन के एक और घातक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर HMS ड्रैगन (HMS Dragon) और अन्य सहयोगी देशों के युद्धपोतों के बेड़े से जुड़ेगा।
दरअसल, इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद, जवाब में तेहरान (ईरान) ने इस पूरे स्ट्रेट को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया था। यह जलमार्ग वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रासायनिक उर्वरकों की सप्लाई के लिए दुनिया की सबसे मुख्य लाइफलाइन माना जाता है। इस नाकेबंदी के कारण जो कड़े वैश्विक नुकसान हुए हैं, उन्हें नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| प्रभावित होने वाला क्षेत्र (Impact Area) | संकट और नुकसान का पूरा ब्योरा |
| फंसे हुए जहाजों की संख्या | ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 6,000 व्यापारिक जहाज इस रास्ते को पार नहीं कर पाए हैं। |
| ऊर्जा बाजार (Energy Market) | दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है, जिसके ब्लॉक होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगीं। |
| सप्लाई चेन (Supply Chain) | जहाजों के फंसे होने से माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर व्यापारिक कंपनियों का भरोसा डगमगाया है। |
क्या कहता है अमेरिकी प्रशासन?
इस पूरे सुरक्षा मिशन और वर्तमान राजनीतिक हालात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा बयान: “हम इजरायल और इस क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण सहयोगियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। ईरान के साथ समझौते को लेकर काफी हद तक बातें तय हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी कुछ अंतिम पहलुओं और कड़े विवरणों को फाइनल करना बाकी है, जिसकी घोषणा बहुत जल्द की जाएगी।”
जब तक यह शांति समझौता पूरी तरह धरातल पर नहीं आ जाता, तब तक ब्रिटिश नौसेना के कमांडर और सैकड़ों नौसैनिक पूरी तरह मुस्तैद हैं। उनका कहना है कि स्ट्रेट को पूरी तरह साफ करने और जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित लेन बनाने में महीनों या सालों का कड़ा समय लग सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों और व्यापारिक जहाजों को ‘पूर्ण सुरक्षा का भरोसा’ दिलाने के लिए उनकी सेना पूरी तरह से तैयार है।
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