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85 करोड़ रुपये लोन लेकर गिरवी प्रॉपर्टी बेचने का खेल, गयाजी में ED की बड़ी कार्रवाई

बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक शहर गयाजी में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी से वित्तीय गलियारों और भू-माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है। मामला करीब 85 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बैंक लोन घोटाले और उससे जुड़ी संपत्तियों की हेराफेरी से जुड़ा हुआ है, जिसने वित्तीय संस्थानों से लेकर जांच एजेंसियों तक के होश उड़ा दिए हैं। कर्ज की रकम को डकारने के बाद जिस शातिर तरीके से बैंकों के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों को चुपचाप बेच दिया गया, उसने वित्तीय धोखाधड़ी के एक नए और बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद से गयाजी और आसपास के इलाकों में उन तमाम लोगों की नींद उड़ गई है जो इस गैरकानूनी नेटवर्क के जरिए बैंकों को करोड़ों का चूना लगाने के काम में संलिप्त रहे हैं। सुबह-सुबह ईडी की टीमों का अचानक विभिन्न ठिकानों पर धमकना इस बात का साफ संकेत है कि एजेंसी अब इस आर्थिक अपराध की तह तक जाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले के मुख्य आरोपियों ने विभिन्न बैंकों से अपने व्यावसायिक उपक्रमों और परियोजनाओं के नाम पर लगभग 85 करोड़ रुपये का भारी कर्ज उठाया था। नियमानुसार इस लोन को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने अपनी कीमती जमीनें और कमर्शियल संपत्तियां बैंकों के पास बंधक यानी गिरवी रख दी थीं। लेकिन शातिर अपराधियों ने खेल तब शुरू किया जब उन्होंने कागजों और मिलीभगत के खेल के जरिए उन गिरवी रखी गई संपत्तियों को बैंकों की बिना अनुमति के ही अन्य लोगों को बेचना शुरू कर दिया। बैंक लोन के रूप में जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग करने का यह मामला वित्तीय अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को लांघ चुका है। जब इन कर्जों का भुगतान लंबे समय तक नहीं हुआ और बैंकों ने गिरवी संपत्तियों की सुध लेनी चाही, तब जाकर इस बड़े पैमाने पर चल रहे फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की परतें एक-एक करके खुलनी शुरू हुईं।

गयाजी शहर के भीतर और उसके आसपास के चुनिंदा इलाकों में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों द्वारा एक साथ कई परिसरों पर की गई छापेमारी ने स्थानीय प्रशासनिक अमले में भी खलबली मचा दी है। जिन ठिकानों पर ईडी की टीमें दस्तावेजों को खंगालने में जुटी हैं, वहां भारी मात्रा में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत टाला जा सके। इन परिसरों में मुख्य आरोपियों के आवासीय ठिकानों के अलावा उनके व्यावसायिक कार्यालय और उन फर्मों के पते भी शामिल हैं जिनका इस्तेमाल इस पूरे 85 करोड़ के लोन घोटाले को अंजाम देने के लिए किया गया था। जांच एजेंसी के हाथ कई ऐसे महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज, बैंक खातों के विवरण और रजिस्ट्री के कागजात लगे हैं जो इस बात का पुख्ता सबूत देते हैं कि किस प्रकार सुनियोजित साजिश के तहत बैंकों के नियमों को धता बताकर करोड़ों की संपत्ति को ठिकाने लगाया गया था।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने इसे केवल एक साधारण बैंक फ्रॉड के रूप में नहीं बल्कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग यानी पीएमएलए के तहत दर्ज किया है। जांच के दौरान यह बात भी सामने आ रही है कि लोन के रूप में हासिल किए गए इन 85 करोड़ रुपयों को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनियों और शेल कंपनियों के खातों में घुमाया गया था। इसके बाद उन पैसों से बिहार और अन्य राज्यों में भारी मात्रा में बेनामी संपत्तियां खरीद ली गईं ताकि कानून की पकड़ से आसानी से बचा जा सके। ईडी के अधिकारी अब इस बात की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं कि इस वित्तीय घोटाले के तार देश के अन्य हिस्सों या किसी बड़े सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलाسه होने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे कई और सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

देशभर में बैंकिंग प्रणाली को खोखला करने वाले ऐसे शातिर आर्थिक अपराधियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का यह शिकंजा इस बात का स्पष्ट संदेश है कि वित्तीय धोखाधड़ी करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। गयाजी में हुई यह बड़ी कार्रवाई न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य के आर्थिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जहाँ लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे कुछ लोगों ने चंद रुपयों के लालच में आकर कानून के साथ खिलवाड़ किया। जैसे-जैसे ईडी की इस छापेमारी और पूछताछ का दायरा आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस 85 करोड़ के लोन और गिरवी प्रॉपर्टी बेचने के इस काले कारोबार से जुड़े हर एक किरदार का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है। जनता और ईमानदार निवेशकों के बीच इस कार्रवाई से एक सकारात्मक संदेश गया है कि वित्तीय व्यवस्था में सेंध लगाने वालों को अंततः कानून के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ता है।