
उत्तर प्रदेश के दो बड़े शहरों—राजधानी लखनऊ और कानपुर को आपस में जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे इन दिनों अपनी इंजीनियरिंग और घटिया निर्माण सामग्री को लेकर सुर्खियों में है। जिस आधुनिक सड़क के निर्माण पर सरकार ने जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से 4200 करोड़ रुपये खर्च किए, वह मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश का दबाव नहीं झेल पाई। हैरानी और चिंता की बात यह है कि महज 17 दिनों के भीतर यह एक्सप्रेस-वे दूसरी बार धंस चुका है, जिससे इस पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
4200 करोड़ के प्रोजेक्ट पर उठे गंभीर सवाल
यह एक्सप्रेस-वे दोनों शहरों के बीच की दूरी को कम करने और सफर को सुगम बनाने के लिए बनाया गया था। लेकिन पहली ही बारिश ने इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट के दावों की हवा निकाल दी है। सड़क का अचानक बीचों-बीच धंस जाना यह साफ बयां करता है कि निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी की भराई, ड्रेनेज सिस्टम और तकनीकी मानकों (Technical Standards) की अनदेखी की गई है। सवाल यह उठता है कि अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि सड़क कुछ ही हफ्तों में बैठने लगे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
यात्रियों की जान पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा
एक्सपेस-वे पर अचानक बड़े-बड़े गड्ढे होने और सड़क धंसने से हादसों की आशंका कई गुना बढ़ गई है। खासकर रात के समय या तेज रफ्तार में वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। घटना के बाद से प्रशासन ने भले ही सुरक्षा के एहतियात के तौर पर ट्रैफिक डायवर्जन या बैरिकेडिंग कर दी हो, लेकिन रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों यात्रियों और कम्यूटर्स में डर का माहौल बना हुआ है।
प्रशासनिक जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
इस गंभीर घटना के सामने आने के बाद आम जनता और स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। लोग निर्माण करने वाली एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस सड़क की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो आने वाले दिनों में यह बड़ी आपदा का कारण बन सकती है। फिलहाल मरम्मत का काम शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या लीपापोती से इस भ्रष्टाचार के गड्ढे को भरा जा सकेगा?
girls globe