
आसमान में बादलों के बीच 30 हजार फीट की ऊंचाई पर शांति से उड़ रहे एक वाणिज्यिक यात्री विमान में उस वक्त अचानक कोहराम मच गया, जब एक सिरफिरे यात्री ने हवा में ही भयानक उत्पात मचाना शुरू कर दिया। सफर के दौरान सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद एक पुरुष यात्री ने बिना किसी स्पष्ट कारण के अपनी सीट से उठकर चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह व्यक्ति मानसिक रूप से बेहद असंतुलित और हिंसक नजर आ रहा था। उसने पहले पास बैठे मुसाफिरों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की, और जब फ्लाइट अटेंडेंट्स ने उसे शांत कराने की कोशिश की, तो वह उन पर भी झपट पड़ा। यात्री का आक्रामक रुख इस कदर बढ़ गया कि उसने विमान के आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exit Door) की ओर भागकर उसका हैंडल खींचने और कॉकपिट की सुरक्षा दीवार को लात मारने का प्रयास किया। 30,000 फीट की ऊंचाई पर प्रेशराइज्ड केबिन के भीतर इमरजेंसी गेट के साथ छेड़छाड़ की कोशिश ने प्लेन में सवार 150 से अधिक यात्रियों की सांसें अटका दीं और पूरे विमान में बच्चों व महिलाओं की चीख-पुकार गूंजने लगी।
विमान के भीतर हालात सेकंड-दर-सेकंड बदतर होते जा रहे थे और आरोपी किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं था। वह बार-बार क्रू मेंबर्स पर हमला कर रहा था और उन्हें दांतों से काटने तथा घूंसे मारने की कोशिश कर रहा था। ऐसे गंभीर संकट के समय जब विमान और उसमें सवार सभी यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडराने लगा, तो केबिन क्रू की त्वरित अपील पर विमान में सवार तीन से चार साहसी पुरुष सहयात्री तत्काल आगे आए। सहयात्रियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उस हिंसक यात्री को पीछे से दबोच लिया और उसे फर्श पर गिरा दिया।
हालांकि, भारी वजन और हिंसक उन्माद के चलते वह लगातार खुद को छुड़ाने के लिए छटपटा रहा था। इस आपात स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फ्लाइट अटेंडेंट्स ने विमान के इमरजेंसी किट में मौजूद भारी-भरकम ‘डक्ट टेप’ (Duct Tape) और केबल टाई (जिप-टाई) का सहारा लिया। यात्रियों और क्रू ने मिलकर आरोपी के दोनों हाथों को पीछे बांधा, उसके पैरों को कसकर जकड़ा और फिर उसे वापस उसकी सीट पर बैठाकर शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को डक्ट टेप के कई मजबूत फेरों से सीट के साथ पूरी तरह बांध दिया। उसके मुंह पर भी आंशिक टेप लगाया गया ताकि वह अन्य यात्रियों को काटने या थूकने की कोशिश न कर सके। उपद्रवी यात्री को पूरी तरह पंगु बनाए जाने के बाद ही विमान के भीतर यात्रियों ने राहत की सांस ली।
केबिन के भीतर मचे इस अप्रत्याशित हिंसक हंगामे और गेट से छेड़छाड़ की गंभीरता को देखते हुए विमान के मुख्य कैप्टन ने एक पल भी गंवाना उचित नहीं समझा। पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को तुरंत स्थिति की गंभीरता से अवगत कराते हुए विमान में अनियंत्रित यात्री (Level-3 Unruly Passenger) की मौजूदगी की सूचना दी और आपातकालीन लैंडिंग की अनुमति मांगी। एटीसी ने तुरंत रूट के सभी सामान्य ट्रैफिक को रोकते हुए विमान को नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्राथमिकता के आधार पर उतरने का क्लियरेंस दे दिया।
विमान के रनवे को छूते ही वहां पहले से तैनात एयरपोर्ट सुरक्षा बल, सीआईएसएफ/स्थानीय पुलिस और पैरामेडिकल टीमों ने विमान को चारों तरफ से घेर लिया। जैसे ही विमान के दरवाजे खुले, सुरक्षा कर्मी सीधे अंदर दाखिल हुए और सीट पर डक्ट टेप से बंधे उपद्रवी यात्री को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने आरोपी को हथकड़ी लगाकर सीधे स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचाया, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों ने विमान के सभी यात्रियों और केबिन क्रू के बयान दर्ज किए और सुरक्षा जांच पूरी होने के कई घंटों बाद ही विमान को अपने गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
विमान के भीतर किसी यात्री को डक्ट टेप से बांधने का यह कोई पहला वाकया नहीं है, लेकिन आम जनता के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या हवा में किसी यात्री को इस तरह बांधना कानूनी रूप से सही है? अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO), अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार, अनियंत्रित यात्रियों के व्यवहार को तीन प्रमुख स्तरों में बांटा गया है:
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लेवल 1 (मौखिक उपद्रव): अभद्र भाषा का प्रयोग या चालक दल के निर्देशों की अनदेखी करना।
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लेवल 2 (शारीरिक हमला): धक्का-मुक्की करना, क्रू या यात्रियों पर हाथ उठाना या सामान फेंकना।
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लेवल 3 (जानलेवा खतरा): कॉकपिट में घुसने की कोशिश करना, इमरजेंसी गेट खोलना, या किसी हथियार/वस्तु से जानलेवा हमला करना।
विमानन नियमों के अनुसार, लेवल-3 की स्थिति में विमान और उसमें सवार सैकड़ों यात्रियों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में यदि कोई यात्री शारीरिक नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो विमान के पायलट-इन-कमांड के पास यह कानूनी अधिकार होता है कि वह केबिन क्रू और सहयात्रियों को उस व्यक्ति को नियंत्रित करने के लिए ‘उचित बल और गैर-घातक निरोधक उपायों’ (Non-Lethal Physical Restraints) का उपयोग करने का आदेश दे सके। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एयरलाइंस की इमरजेंसी किट में रिस्ट्रेंट टेप या डक्ट टेप को एक आधिकारिक सुरक्षा उपकरण माना जाता है, ताकि हिंसक व्यक्ति को सुरक्षित लैंडिंग तक पूरी तरह निष्प्रभावी रखा जा सके।
हवा में सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डालने वाले इस उपद्रवी यात्री के खिलाफ पुलिस और विमानन सुरक्षा प्राधिकरणों ने कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी के खिलाफ विमान अपहरण रोधी अधिनियम (Anti-Hijacking Law), विमान सुरक्षा में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने और गैर-इरादतन हत्या के प्रयास की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को कई वर्षों के कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, विमानन कंपनी ने आरोपी यात्री को अपनी आंतरिक सुरक्षा समिति की सिफारिश पर तुरंत प्रभाव से ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ (No-Fly List) में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत उस पर जीवनभर या न्यूनतम 2 से 5 वर्षों के लिए किसी भी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन में उड़ान भरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, आपातकालीन लैंडिंग के कारण एयरलाइन को ईंधन डंप करने, विमान डायवर्जन और एयरपोर्ट हैंडलिंग के मद में जो लाखों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है, उसकी कानूनी भरपाई भी सिविल सूट के जरिए आरोपी से ही वसूलने की तैयारी की जा रही है।
हाल के वर्षों में वैश्विक और घरेलू उड़ानों में यात्रियों द्वारा बदसलूकी, नशे में धुत्त होकर हंगामा करने या फ्लाइट क्रू पर हमला करने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। विमानन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई यात्रा से जुड़ा मानसिक तनाव, फ्लाइट में अत्यधिक शराब का सेवन, नींद की कमी और कुछ मामलों में पैनिक अटैक या फोबिया यात्रियों में इस तरह के चरम हिंसक व्यवहार को ट्रिगर कर देते हैं।
विशेषज्ञों ने एयरलाइंस और नियामक संस्थाओं से मांग की है कि बोर्डिंग गेट्स पर ही यात्रियों के नशे के स्तर और उनके व्यवहार की कड़ी प्री-फ्लाइट स्क्रीनिंग की जाए, ताकि किसी भी संदिग्ध या असामान्य बर्ताव वाले व्यक्ति को विमान में चढ़ने से पहले ही रोका जा सके। 30 हजार फीट की ऊंचाई पर घटी इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आसमान में उड़ते विमान में सुरक्षा से बड़ा कोई नियम नहीं होता, और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए उठाए गए असाधारण कदम ही सैकड़ों जिंदगियों को बचाते हैं।
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