
रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीना हर इंसान का सपना होता है। नौकरी या बिजनेस के दिनों में हम जो सबसे बड़ी चिंता पालते हैं, वह यही होती है कि काम छोड़ने के बाद हर महीने घर का खर्च कैसे चलेगा? अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर रिटायरमेंट के समय उनके पास ₹1.5 करोड़ का एकमुश्त फंड (Corpus) तैयार हो जाए, तो क्या वे बिना किसी रिस्क के हर महीने ₹1 लाख की रेगुलर इनकम पा सकते हैं?
वित्तीय विशेषज्ञों (Financial Experts) का कहना है कि इसका सीधा जवाब ‘हां’ है। लेकिन यह इतना भी सीधा नहीं है जितना दिखता है। आप हर महीने कितना पैसा अपने खाते में देखना चाहते हैं, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप अपने पैसे को कहाँ निवेश करते हैं, आपकी रिस्क लेने की क्षमता कितनी है और आप हर साल कितना पैसा फंड से निकाल रहे हैं।
रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से कैसे बदलेगी आपकी मासिक आय?
रिटायरमेंट प्लानिंग का असली मतलब सिर्फ ज्यादा ब्याज या रिटर्न कमाना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आपका पैसा आपकी आखिरी सांस तक आपका साथ निभाए और लगातार बढ़ने वाली महंगाई को भी मात दे सके।
आइए नीचे दी गई तालिका से समझते हैं कि निवेश की तीन अलग-अलग रणनीतियों के आधार पर आपके ₹1.5 करोड़ के फंड से हर महीने कितनी आय हो सकती है:
तीनों रणनीतियों को गहराई से समझें
1. कंजर्वेटिव इन्वेस्टर: फोकस सिर्फ सुरक्षा पर
अगर आप ऐसे व्यक्ति हैं जो रिटायरमेंट के बाद अपनी जमा पूंजी पर एक प्रतिशत का भी रिस्क या बाजार का उतार-चढ़ाव नहीं देखना चाहते, तो आपके लिए सरकारी और पूरी तरह सुरक्षित योजनाएं बेस्ट हैं। इसमें आपकी मूल पूंजी सुरक्षित रहती है और एक तय ब्याज मिलता रहता है। इस रास्ते पर चलकर आप हर महीने आसानी से ₹70,000 से ₹85,000 तक कमा सकते हैं। हालांकि, इसका एक नकारात्मक पहलू यह है कि लंबे समय में यह रणनीति महंगाई दर (Inflation) का मुकाबला नहीं कर पाती।
2. मॉडरेट पोर्टफोलियो: सुरक्षा के साथ थोड़ी बढ़त
यह रणनीति उन लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय है जो अपने पैसे को सुरक्षित भी रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनका फंड समय के साथ थोड़ा बढ़े भी। इसमें आपके ₹1.5 करोड़ के फंड को डेट (Frees/Safe) और इक्विटी (Stocks/Growth) के बीच संतुलित तरीके से बांटा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैलेंस्ड अप्रोच से आप हर महीने ₹85,000 से लेकर पूरे ₹1 लाख तक की मासिक आय बिना किसी बड़े तनाव के हासिल कर सकते हैं।
3. एग्रेसिव इन्वेस्टर: महंगाई को मात देने की तैयारी
यदि आपकी रिस्क उठाने की क्षमता अच्छी है और आप समझते हैं कि लंबे समय के लिए शेयर बाजार का रिटर्न सुरक्षित योजनाओं से बेहतर होता है, तो आप अपने फंड का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में डाल सकते हैं। इस रणनीति के जरिए हर महीने ₹1 लाख से लेकर ₹1.2 लाख तक की शानदार कमाई बिल्कुल संभव है। लेकिन याद रहे, यदि बाजार में कोई बड़ी गिरावट आती है, तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू भी कुछ समय के लिए तेजी से नीचे आ सकती है।
बकेट स्ट्रेटेजी (Bucket Strategy) और सुरक्षित निकासी दर का नियम
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, अपने ₹1.5 करोड़ के फंड को कभी भी एक ही जगह नहीं रखना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञ ‘बकेट स्ट्रेटेजी’ की सलाह देते हैं।
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पहला बकेट (अल्पकालिक): अगले 3 से 5 साल के खर्च के लिए पैसा लिक्विड या फिक्स्ड डिपॉजिट में रखें।
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दूसरा बकेट (मध्यम अवधि): सुरक्षित डेट फंड्स या सरकारी योजनाओं में रखें।
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तीसरा बकेट (लंबी अवधि): वह पैसा जिसकी जरूरत 10 साल बाद पड़ेगी, उसे इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में बढ़ने के लिए छोड़ दें।
इसके अलावा, हर साल अपने कुल फंड का केवल 4.5% से 6.5% हिस्सा ही निकालना सुरक्षित माना जाता है। इससे आपकी पूंजी समय से पहले कभी खत्म नहीं होगी।
एक अंतिम सलाह:
रिटायरमेंट प्लानिंग का असली मकसद सिर्फ हर महीने ज्यादा से ज्यादा पैसा निकालना नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देखना होना चाहिए कि वह पैसा आपकी पूरी रिटायरमेंट अवधि (जो 25-30 साल या उससे ज्यादा हो सकती है) तक सुरक्षित रहे। अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखकर, मेडिकल खर्चों के लिए एक अलग हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेकर और अपनी निकासी पर थोड़ा नियंत्रण रखकर आप ₹1.5 करोड़ के इस फंड को ताउम्र अपनी नियमित आय का एक बेहद मजबूत और अटूट जरिया बना सकते हैं।
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