‘हिंदू बेचारा कंफ्यूज है…’ मोहन भागवत और दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता के बयानों पर अरविंद केजरीवाल का तंज, बीजेपी-संघ पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बयानों में दिख रहे विरोधाभास को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ परिवार पर करारा सियासी हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक तीखा पोस्ट शेयर करते हुए केजरीवाल ने चुटकी ली कि देश का “आम हिंदू कंफ्यूज” हो चुका है कि वह संघ की बात माने या अपनी ही पार्टी की दिल्ली सरकार के नियमों का पालन करे।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उठाए सवाल

अपने ऑफिशियल ‘X’ हैंडल पर तंज कसते हुए अरविंद केजरीवाल ने लिखा कि मोहन भागवत जी कह रहे हैं कि हर हिंदू को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए, जबकि दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता जी कह रही हैं कि तीन से ज्यादा बच्चे होने पर ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने आगे लिखा कि इस स्थिति में हिंदू बेचारा पूरी तरह कंफ्यूज है, इसलिए रेखा जी और भागवत जी दोनों को मिलकर यह साफ करना चाहिए कि आखिर हिंदुओं को क्या करना चाहिए।

बयानों और सरकारी नीतियों के टकराव का पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा राजनीतिक विवाद दो अलग-अलग बयानों और एक नई सरकारी कल्याणकारी योजना के नियमों के आपस में टकराने के बाद सामने आया है। कुछ समय पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने देश में घटती जन्मदर और जनसांख्यिकी असंतुलन पर चिंता जताते हुए बयान दिया था कि समाज और देशहित में हिंदू परिवारों को तीन या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए। इसके विपरीत, हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के दिशा-निर्देशों को हरी झंडी दिखाई है, जिसके तहत गरीब महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक मदद देने का प्रावधान है। हालांकि, इस योजना की शर्तों में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इसका लाभ सिर्फ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनके तीन या उससे कम बच्चे हैं, जिससे दोनों के बीच नीतियों का अंतर साफ नजर आ रहा है।

आप का दोहरा निशाना और सियासी घमासान

अरविंद केजरीवाल ने इसी विरोधाभास को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी और संघ पर दोहरा निशाना साधा है। ‘आप’ नेताओं का कहना है कि एक तरफ बीजेपी और आरएसएस वैचारिक मंचों से आबादी बढ़ाने की सलाह देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी अपनी सरकारें ऐसी नीतियां लागू करती हैं जो बड़े परिवारों को सरकारी सहायता से वंचित कर देती हैं। इस तंज के बाद से राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक बार फिर जनसंख्या नीति और पारिवारिक नियोजन को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।