News India Live, Digital Desk: ग्लोबल मार्केट में ‘सेफ हैवन’ माना जाने वाला सोना अब अपनी चमक खोता दिख रहा है। जनवरी 2026 में ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक ऑल-टाइम हाई को छूने के बाद, अब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट का दौर शुरू हो गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो सेंट्रल बैंक कल तक सोने के सबसे बड़े खरीदार थे, वे ही अब इसके सबसे बड़े विक्रेता (Sellers) बन गए हैं। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में 12% तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
क्यों ‘मजबूत दीवार’ बनकर टूटे सेंट्रल बैंक?
पिछले कुछ सालों में पोलैंड, चीन और भारत जैसे देशों के बैंकों ने रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी की थी। साल 2025 में ही दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने 328 टन सोना खरीदा था। लेकिन अब लिक्विडिटी प्रेशर (नकदी की कमी) और वैश्विक अस्थिरता ने पासा पलट दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
रूस: युद्ध के नुकसान की भरपाई के लिए 25 साल में पहली बार अपने गोल्ड रिजर्व से 14 टन सोना बेचा।
तुर्किये: अपनी गिरती करेंसी ‘लीरा’ को बचाने के लिए करीब 60 टन सोना बाजार में उतारा।
फ्रांस: न्यूयॉर्क गोल्ड वॉल्ट में रखा अपना पूरा स्टॉक बेचकर सबको हैरान कर दिया।
पोलैंड: डॉलर जुटाने के लिए भारी बिकवाली शुरू कर दी है।
करेंसी और तेल संकट ने बिगाड़ा खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि सेंट्रल बैंक मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह ‘कुर्बानी’ दे रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत ने कच्चे तेल की कीमतों को $60 से सीधे $120 प्रति बैरल पर पहुंचा दिया है। तेल आयात करने के लिए देशों को डॉलर की सख्त जरूरत है। अपनी नेशनल करेंसी को टूटने से बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के लिए बैंक सोने को बेचकर नकदी जुटा रहे हैं।
भारत का क्या है स्टैंड?
जहां दुनिया भर के बैंक सोना बेच रहे हैं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2025 में 4 टन सोने की खरीदारी की थी। हालांकि, वैश्विक स्तर पर हो रही भारी बिकवाली का असर भारतीय बाजारों पर भी दिख रहा है। निवेशकों में अब यह डर बैठ गया है कि अगर सेंट्रल बैंकों ने इसी तरह अपना स्टॉक निकालना जारी रखा, तो कीमतों में और बड़ी गिरावट आ सकती है।
क्या फिर बढ़ेगा सोने का भाव?
बाजार जानकारों के मुताबिक, सोने का भविष्य अब दो प्रमुख कारकों पर टिका है:
कच्चे तेल की कीमतें: यदि तेल के दाम गिरते हैं, तो करेंसी पर दबाव कम होगा और बैंक सोना बेचना बंद कर सकते हैं।
भू-राजनीतिक तनाव: अगर ईरान-अमेरिका युद्ध थमता है और डॉलर कमजोर होता है, तभी सोने में फिर से तेजी लौटने की उम्मीद की जा सकती है।
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