सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने गंवाए 10 लाख तो खुली पोल, तेलंगाना CID का देशव्यापी एक्शन, डफाबेट ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह के 11 धुरंधर गिरफ्तार

India News Live, Digital Desk : आज के डिजिटल युग में रातों-रात अमीर बनने और आसानी से पैसा कमाने का लालच देकर मासूम नागरिकों को कंगाल बनाने वाले ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोहों का जाल पूरे देश में तेजी से पैर पसार रहा है। इस अवैध धंधे के खिलाफ तेलंगाना पुलिस की सीआईडी (CID) विंग ने एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म ‘डफाबेट’ (Dafabet) के जरिए भारत के कई राज्यों में करोड़ों रुपये का सट्टा बाजार चलाने वाले एक बेहद शातिर और संगठित गिरोह का सीआईडी ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों से कुल 11 आरोपियों को दबोचा है, जिनमें एक अफगानी नागरिक भी शामिल है जो कमीशन के आधार पर इस पूरे नेक्सस को चला रहा था। यह गिरोह देश के युवाओं और पढ़े-लिखे लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था और फिर उस पैसे को विदेशों में ट्रांसफर कर देता था।

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बर्बादी से शुरू हुई जांच, ऐसे खुला 46 ‘म्यूल’ बैंक खातों का मकड़जाल

इस पूरे इंटरनेशनल रैकेट के भंडाफोड़ की कहानी तब शुरू हुई जब करीमनगर के एक सीधे-साधे सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने ‘डफाबेट’ एप के लुभावने विज्ञापनों और बोनस के झांसे में आकर साल 2024 से जनवरी 2025 के बीच सट्टेबाजी में अपने खून-पसीने के 9.95 लाख रुपये गंवा दिए। सब कुछ बर्बाद होने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए तेलंगाना की सीआईडी महानिदेशक चारू सिन्हा ने जांच का जिम्मा एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दिया। एसआईटी ने जब तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की, तो अधिकारी भी दंग रह गए। जांच में सामने आया कि इंजीनियर से लूटे गए पैसे को कानून की नजरों से छिपाने के लिए कुल 8 स्तरों (लेयर्स) पर फैलाया गया था और इसके लिए 46 ‘म्यूल’ (फर्जी) बैंक खातों के एक जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था। ये ऐसे खाते होते हैं जो गरीबों या अंजान लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर खुलवाए जाते हैं और अपराधियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

6 महीने का फॉरेंसिक विश्लेषण और 3 राज्यों में बिछाया गया सीआईडी का गुप्त जाल

एसआईटी के जांबाजों ने करीब 6 महीने तक बैंक लेन-देन, संदिग्ध मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और बंद वाट्सएप ग्रुप्स का बेहद बारीकी से फॉरेंसिक विश्लेषण किया। इस लंबी जांच के बाद पता चला कि यह कोई छोटा-मोटा गैंग नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक बहुत बड़ा आपराधिक नेटवर्क है, जो डफाबेट एप के जरिए क्रिकेट मैच, ऑनलाइन कैसीनो गेम्स और चर्चित ‘एविएटर’ (Aviator) प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी को प्रमोट कर रहा था। आरोपियों को पकड़ने के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली, गुजरात और पंजाब में सीआईडी की 6 विशेष टीमें तैनात की गईं। शातिर सटोरिये पुलिस को चकमा देने के लिए हर दो दिन में अपने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और छिपने के ठिकाने बदल रहे थे। इसके बावजूद, पुलिस ने दो सप्ताह तक लगातार जमीन पर रहकर कड़ा सर्विलांस चलाया और आखिरकार 29 मई को सभी 11 आरोपियों को धर दबोचा, जिन्हें ट्रांजिट वारंट पर हैदराबाद लाया गया है।

अफगान नागरिक से लेकर टेक एक्सपर्ट्स तक, हर किसी का काम था फिक्स

गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों के काम करने का तरीका (Modus Operandi) किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह था। इनमें से दो मुख्य आयोजक थे, जो सीधे डफाबेट मुख्य ऑपरेटरों से फंड प्राप्त करते थे। तीन आरोपियों का काम केवल कमीशन बांटकर लोगों के फर्जी ‘म्यूल’ खाते तैयार करना था। दो अन्य आरोपियों ने सट्टेबाजी के पैसे को वैध दिखाने के लिए कई फर्जी फर्में और शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनमें पैसा ट्रांसफर किया जाता था। चार अन्य आरोपी इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए टेक्निकल सपोर्ट और सुरक्षित सर्वर की व्यवस्था देखते थे। वहीं, पकड़ा गया अफगान नागरिक विदेशी नेटवर्क और कमीशन के आधार पर बड़े म्यूल खातों के लेन-देन का मैनेजमेंट संभालता था।

आरोपियों के खिलाफ देश भर में दर्ज हैं 73 मुकदमे, लग्जरी गाड़ियां और लैपटॉप जब्त

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आधिकारिक आंकड़ों को खंगालने पर पता चला कि इस खतरनाक गैंग के खिलाफ आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत कई राज्यों में 225 से ज्यादा शिकायतें और 73 गंभीर आपराधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं। पुलिस ने इन सटोरियों के पास से 3 आलीशान कारें, 8 हाई-टेक लैपटॉप, 26 मोबाइल फोन और 3.21 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। सीआईडी प्रमुख ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि तेलंगाना में ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ पूरी तरह से प्रतिबंधित और अवैध है। पुलिस अब तक राज्यभर में विभिन्न अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एप्लिकेशनों के खिलाफ 414 कड़े मामले दर्ज कर चुकी है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।