सुप्रीम कोर्ट को मजाक बना दिया है जस्टिस सूर्यकांत ने तुच्छ याचिकाओं पर लगाई फटकार, वकीलों को दी नसीहत

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News India Live, Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों का कीमती समय बर्बाद करने वाली याचिकाओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि लोग छोटी-छोटी बातों और बिना किसी ठोस कानूनी आधार के सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं, जिससे गंभीर मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है।

1. जस्टिस सूर्यकांत की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं और वकीलों को सचेत करते हुए कहा:

वक्त की बर्बादी: “सुप्रीम कोर्ट संवैधानिक मुद्दों और गंभीर कानूनी सवालों के समाधान के लिए है। हर छोटा मामला यहाँ लेकर आना पूरी न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करता है।”

जुर्माने की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई भी याचिका बिना किसी कानूनी मेरिट के केवल समय काटने के उद्देश्य से दाखिल की गई, तो अदालत भारी जुर्माना (Exemplary Costs) लगाने में संकोच नहीं करेगी।

2. क्यों बढ़ रही है चिंता?

सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 80,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने रेखांकित किया कि:

तुच्छ याचिकाओं के कारण उन कैदियों और पीड़ितों के मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती जो सालों से जेल में हैं या न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं।

वकीलों की यह जिम्मेदारी है कि वे मुवक्किलों को सही सलाह दें और उन्हें केवल प्रचार पाने के लिए शीर्ष अदालत आने से रोकें।

3. ‘PIL’ के दुरुपयोग पर भी सवाल

अदालत ने यह भी देखा कि जनहित याचिकाओं (PIL) के नाम पर अक्सर व्यक्तिगत हित साधने या राजनीतिक स्कोर सेट करने की कोशिश की जाती है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका के संसाधनों का उपयोग आम जनता के व्यापक हितों के लिए होना चाहिए, न कि निजी हितों के लिए।

4. क्या है समाधान? (The Model)

सुप्रीम कोर्ट अब ऐसी याचिकाओं को शुरुआती स्तर (Admission stage) पर ही खारिज करने की रणनीति अपना रहा है। जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि निचली अदालतों और हाई कोर्ट्स को और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि छोटे विवाद वहीं सुलझ सकें और केवल अनिवार्य मामले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचें।

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