
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों को अक्सर उनकी कड़ी कार्यशैली, फाइलों के अंबार और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाना जाता है, लेकिन जब कोई अधिकारी अपनी ड्यूटी की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे जनता की संस्कृति, भाषा और उनके दिलों में अपनी जगह बना लेता है, तो वह अधिकारी प्रशासनिक मशीनरी से ऊपर उठकर जननायक बन जाता है। बिहार के जहानाबाद जिले से हाल ही में एक ऐसा ही दिल को छू लेने वाला और प्रेरणादायक वाकया सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में सनसनी फैला दी है। सिक्किम जैसे सुदूर पूर्वोत्तर राज्य से ताल्लुक रखने वाली और अपनी कार्यकुशलता के लिए पहचानी जाने वाली जहानाबाद की जिलाधिकारी (DM) छिरिङ वाई भूटिया ने जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से पूरी सहजता और अपनापन दिखाते हुए ‘मगही’ भाषा में संवाद करना शुरू किया, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। सिक्किम की वादियों से निकलकर बिहार की माटी की इस बोली में अधिकारी का ऐसा घुलना-मिलना लोगों के दिलों को गहराई तक छू गया।
छिरिङ वाई भूटिया की यह कहानी सिर्फ एक आईएएस अधिकारी के ट्रांसफर और पोस्टिंग की कहानी नहीं है, बल्कि यह दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच के सुंदर समन्वय का जीवंत उदाहरण है। भारत के पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाली छिरिङ वाई भूटिया ने जब यूपीएससी (UPSC) की कठिन परीक्षा पास करके सिविल सेवा में कदम रखा, तो उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ। बिहार जैसी चुनौतीपूर्ण कार्य संस्कृति, जटिल सामाजिक ताने-बाने और प्रशासनिक चुनौतियों वाले राज्य में काम करना किसी भी नए अधिकारी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन छिरिङ वाई भूटिया ने अपनी शुरुआती हिचकिचाहट को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी ताकत बनाया। उन्होंने बिहार की लोक संस्कृति, खान-पान और विशेष तौर पर यहां की क्षेत्रीय बोलियों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई, जिसका परिणाम आज सबके सामने है कि वे आम जनता के बीच उनकी अपनी भाषा में संवाद स्थापित कर रही हैं।
जहानाबाद जिले में आयोजित एक सरकारी समीक्षा बैठक या जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान जब डीएम छिरिङ वाई भूटिया मंच पर बोलने के लिए उठीं, तो किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि वे स्थानीय लहजे में लोगों को संबोधित करेंगी। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत करते ही जब मगही भाषा (Magahi Language) के ठेठ शब्दों और मुहावरों का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो सभागार में बैठे ग्रामीण, बुजुर्ग और युवा सभी अवाक रह गए। मगही में उनका वह अपनापन भरा संबोधन सुनकर लोगों के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। किसी अधिकारी द्वारा जनता की मातृभाषा का इस प्रकार सम्मान करना और उसमें संवाद करना इस बात का सबूत है कि वे केवल कागजी आदेशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे धरातल पर जनता के सुख-दुख और उनकी भावनाओं को पूरी शिद्दत से समझती हैं।
भारत जैसे विविधता से भरे देश में भाषा अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर सबसे बड़ी बाधा बन जाती है, खासकर जब कोई अधिकारी प्रशासनिक भाषा के रूप में हिंदी या अंग्रेजी का ही प्रयोग करता है। लेकिन जब एक आईएएस अधिकारी सिक्किम जैसे हिंदी पट्टी से अलग राज्य से आकर बिहार के किसी जिले में वहां की स्थानीय मगही बोली में संवाद करती है, तो शासन और जनता के बीच की सारी दीवारें स्वतः गिर जाती हैं। जहानाबाद की जनता का कहना है कि जब डीएम मैडम उनकी अपनी भाषा में उनकी समस्याएं सुनती हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि वे किसी दूरदराज के अफसर से नहीं बल्कि अपने ही परिवार के किसी सदस्य से बात कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की यह मानवीय और संवेदनशीलता से भरी शैली आज के दौर में सुशासन की सबसे बड़ी मिसाल पेश कर रही है।
डीएम छिरिङ वाई भूटिया के मगही में बोलने का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर सामने आया, यह जंगल की आग की तरह वायरल हो गया। बिहार के कोने-कोने से लोग इस महिला आईएएस अधिकारी की सादगी, सीखने की लगन और जनता के प्रति उनके आत्मीय लगाव की जमकर तारीफ कर रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स का कहना है कि अगर देश के हर जिले के प्रशासनिक अधिकारी इसी तरह जनता की भाषा और उनकी संस्कृति को अपना लें, तो प्रशासन और जनता के बीच का फासला हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। सिक्किम की शान और बिहार की मान बनीं डीएम छिरिङ वाई भूटिया ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची प्रशासनिक सफलता केवल फाइलों के निस्तारण में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों को जीतने में निहित है।
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