
हिंदू धर्म में सावन का महीना शिव भक्तों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता। साल 2026 का सावन ज्योतिषीय दृष्टि से भी काफी खास माना जा रहा है। मान्यता है कि इस पवित्र महीने में भगवान शिव धरती पर निवास करते हैं और अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन में केवल एक लोटा जल आपके जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी को दूर कर सकता है? जी हां, अगर आपकी कुंडली में किसी भी तरह का ग्रह दोष है, तो सावन के महीने में सही तरीके से किया गया जलाभिषेक आपको नवग्रहों की पीड़ा से हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकता है। आइए जानते हैं कि किस ग्रह को शांत करने के लिए महादेव का जलाभिषेक कैसे करना चाहिए।
नवग्रह पीड़ा और सावन का सीधा कनेक्शन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली में राहु, केतु, शनि या कोई अन्य ग्रह नीच या कमजोर स्थिति में होता है, तो इंसान को बेवजह की आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिव पुराण में साफ तौर पर बताया गया है कि भगवान शिव ही सभी ग्रहों के नियंत्रक हैं। इसलिए सावन के महीने में जब हम पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, तो नवग्रहों का बुरा असर अपने आप कम होने लगता है। शिव की पूजा से न सिर्फ मन को शांति मिलती है, बल्कि जीवन में आ रही पुरानी रुकावटें भी धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।
किस ग्रह के लिए कैसे करें अभिषेक?
अगर आप शनि देव की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान चल रहे हैं, तो सावन में जल के अंदर थोड़े से काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शनि का प्रकोप कम होता है। वहीं, अगर राहु-केतु का दोष परेशान कर रहा है, तो जल में कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास) डालकर जलाभिषेक करना बहुत फायदेमंद साबित होता है।
चंद्रमा मन का कारक है और शिव ने इसे अपने मस्तक पर धारण किया है। अगर कुंडली में चंद्र दोष है या घर में कलह रहती है, तो कच्चे दूध में थोड़ा सा गंगाजल और मिश्री मिलाकर महादेव का अभिषेक करें। इसके अलावा, सूर्य ग्रह को मजबूत करने और करियर में रुकी हुई तरक्की पाने के लिए जल में लाल चंदन या थोड़ा सा गुड़ मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।
जलाभिषेक के समय रखें यह खास ध्यान
सावन में शिव पूजा करते समय कुछ छोटी लेकिन अहम बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जलाभिषेक हमेशा तांबे या पीतल के लोटे से ही करें, लेकिन अगर आप दूध चढ़ा रहे हैं तो स्टील या चांदी के बर्तन का ही इस्तेमाल करें, तांबे के बर्तन में दूध न डालें। जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप मन ही मन करते रहें। इसके अलावा, शिवलिंग पर कभी भी खंडित (टूटे हुए) बेलपत्र या तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं। बस साफ मन और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा ही महादेव को सबसे जल्दी प्रसन्न करती है।
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