
बिहार में कुख्यात अपराधी भारत तिवारी के पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में मारे जाने के बाद सूबे की सियासत का पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस एनकाउंटर को लेकर जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक पुराना वीडियो बयान जंगल की आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो में नीतीश कुमार बेहद तल्ख लहजे में यह कहते नजर आ रहे हैं कि ‘अपराधियों को सजा देने का काम अदालत का है, पुलिस का नहीं।’ इस पुराने बयान के दोबारा सतह पर आने के बाद अब बिहार की एनकाउंटर नीति और कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
क्या है नीतीश कुमार का वो पुराना बयान जो अब बना जी का जंजाल
वायरल हो रहा यह वीडियो कुछ साल पुराना बताया जा रहा है, जब बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उस समय नीतीश कुमार ने मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की वकालत करते हुए साफ कहा था कि हमारी सरकार ‘रूल ऑफ लॉ’ (कानून का राज) पर चलती है। पुलिस का काम अपराधियों को पकड़कर अदालत के सामने पेश करना और पुख्ता सबूत जुटाना है, न कि खुद जज बनकर मौके पर ही उनका फैसला करना। आज जब भारत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं, तो विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता इसी वीडियो को ढाल बनाकर नीतीश सरकार को घेर रहे हैं।
भारत तिवारी एनकाउंटर और पुलिस की कहानी पर उठते सवाल
जियोग्राफिकल और लोकल क्राइम इन्वेस्टिगेशन के मुताबिक, पुलिस ने दावा किया था कि भारत तिवारी को पकड़ने गई टीम पर उसने पहले फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षार्थ पुलिस को भी गोलियां चलानी पड़ीं और वह मारा गया। लेकिन इस एनकाउंटर के तुरंत बाद स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया के जरिए इस थ्योरी को ‘फर्जी एनकाउंटर’ का नाम दिया जाने लगा। एआई (AI) और आधुनिक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के ट्रेंड्स को देखें तो इंटरनेट पर लोग इस समय बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और मुख्यमंत्री के स्टैंड के बीच के विरोधाभास को सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं।
‘सुशासन बाबू’ की छवि और एनकाउंटर कल्चर के बीच फंसी सरकार
नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति में हमेशा ‘सुशासन बाबू’ के रूप में जाना जाता रहा है, जो न्याय के साथ विकास की बात करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में अपराधियों के खिलाफ पुलिस के सख्त और आक्रामक रुख को देखकर लोग इसकी तुलना उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर और एनकाउंटर’ मॉडल से करने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि सुशासन की बात करने वाले मुख्यमंत्री के राज में पुलिस का इस तरह बेकाबू होना उनके अपने ही सिद्धांतों के खिलाफ है। यही वजह है कि यह वीडियो इस समय गूगल डिस्कवर और बिंग एईओ (AEO) पर सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुका है, जिसने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है।
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