फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर से फीफा वर्ल्ड कप का ‘सुपरस्टार’, डेनिज़ उन्दाव ने कैसे बदली अपनी तकदीर

फीफा विश्व कप 2026 में डेनिज़ उन्दाव (Deniz Undav) का नाम अब हर फुटबॉल प्रेमी की जुबान पर है। टोरंटो में आइवरी कोस्ट के खिलाफ खेले गए रोमांचक मुकाबले में जब जर्मनी 0-1 से पिछड़ रही थी, तब इस स्ट्राइकर ने मैदान पर कदम रखते ही मैच का रुख बदल दिया। दूसरे हाफ में दो गोल दागकर जर्मनी को 2-1 से ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले डेनिज़ उन्दाव आज भले ही स्टार हैं, लेकिन उनका यह सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय था जब वे अपनी जीविका चलाने के लिए दिन में आठ-आठ घंटे एक फैक्ट्री में ‘लेजर मशीन ऑपरेटर’ के तौर पर काम करते थे।

‘बहुत छोटे हो’ कहकर क्लब ने नकारा, नहीं मानी हार

डेनिज़ उन्दाव का फुटबॉल करियर शुरुआत से ही आसान नहीं था। बुंडेसलीगा क्लब ‘वेर्डर ब्रेमेन’ ने उन्हें यह कहकर टीम से बाहर कर दिया था कि वे एक पेशेवर खिलाड़ी बनने के लिए “बहुत छोटे” हैं। इस रिजेक्शन ने उन्दाव का दिल तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। केवल 17 साल की उम्र में अपना घर छोड़ा और जर्मनी की क्षेत्रीय लीग में हावेलसे टीम के लिए खेलना शुरू किया। उस दौर को याद करते हुए उन्दाव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें फुटबॉल के साथ-साथ फैक्ट्री में मेहनत करनी पड़ती थी, क्योंकि सिर्फ फुटबॉल से मिलने वाले 120 पाउंड में उनका गुजारा नहीं हो सकता था।

सुबह 4 बजे उठना और रात को 8 बजे घर लौटना— ऐसा था रूटीन

उन्दाव ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए बताया, “मैं सुबह 4 बजे उठता था, सीधे फैक्ट्री जाता था, दिन भर लेजर मशीन चलाता था और फिर फुटबॉल की ट्रेनिंग के लिए निकलता था। रात को 8 बजे जब घर पहुँचता था, तो शरीर पूरी तरह थक चुका होता था, लेकिन अगले दिन फिर वही रूटीन दोहराता था।” यही वह कड़ी मेहनत थी जिसने उन्हें मैदान पर कभी न हार मानने वाला जज्बा दिया। आज भी, करोड़ों की संपत्ति और शोहरत के बावजूद, उन्दाव का कहना है कि उन्हें डिजाइनर कपड़ों या लग्जरी कारों का कोई शौक नहीं है क्योंकि वे गरीबी और मेहनत का असली अर्थ अच्छी तरह समझते हैं।

2014 के बाद जर्मनी को नॉकआउट में पहुँचाने का कारनामा

जर्मन राष्ट्रीय टीम में देरी से प्रवेश पाने वाले डेनिज़ उन्दाव ने 2024 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। यूरो कप 2024 में उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिले और पूरे टूर्नामेंट में केवल छह मिनट ही खेलने को मिला। लेकिन फीफा विश्व कप 2026 आते-आते वे टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए। आइवरी कोस्ट के खिलाफ 60वें मिनट में स्थानापन्न (Substitute) खिलाड़ी के रूप में उतरे उन्दाव ने 68वें मिनट में शानदार वॉली शॉट के जरिए पहला गोल किया और फिर इंजरी टाइम के 94वें मिनट में विजयी गोल दागकर जर्मनी को 2014 के बाद पहली बार नॉकआउट दौर के लिए क्वालीफाई करवाया।

सादगी ही है डेनिज़ उन्दाव की असली पहचान

फुटबॉल के बड़े सितारों के विपरीत, डेनिज़ उन्दाव आज भी खुद को ‘साधारण व्यक्ति’ मानते हैं। वे दिखावटी पीढ़ी (Show-off generation) का हिस्सा होने से साफ इनकार करते हैं। उनका मानना है कि संघर्ष के दिनों ने उन्हें जमीन से जुड़े रहना सिखाया है। कुराकाओ के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में भी उन्होंने दो असिस्ट और एक गोल करके अपनी उपयोगिता साबित की थी। जर्मनी के लिए यह फॉरवर्ड खिलाड़ी अब भविष्य का बड़ा सितारा बनकर उभरा है।