
उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से विश्व प्रसिद्ध शहर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (बाबतपुर एयरपोर्ट) से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एयरपोर्ट परिसर के भीतर सुरक्षा बलों की तैनाती के दौरान अचानक चली गोलीबारी से वहां अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों तथा एयरपोर्ट कर्मचारियों के बीच भारी दहशत फैल गई। इस अप्रत्याशित घटना में एक महिला और एक युवक को गोली लगने के कारण गंभीर चोटें आईं हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टरों की पैनी नजर बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए और पूरे मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी। सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले एयरपोर्ट के भीतर इस तरह की घटना का सामने आना सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
बाबतपुर एयरपोर्ट पर कैसे मची अफरा-तफरी और क्या है पूरा मामला?
वाराणसी के बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोज की तरह सामान्य कामकाज और यात्रियों की आवाजाही चल रही थी। एयरपोर्ट के अराइवल और डिपार्चर एरिया में यात्रियों की लंबी कतारें थीं और सुरक्षा कर्मी अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभा रहे थे। अचानक सुरक्षा में तैनात सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स यानी सीआईएसएफ (CISF) के एक जवान की सर्विस राइफल से अचानक गोली चल गई। गोली की तेज आवाज सुनते ही एयरपोर्ट परिसर में चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह गोलीबारी किसी आतंकी हमला या बाहरी घुसपैठ का नतीजा नहीं थी, बल्कि सुरक्षा बल के जवान और किसी अन्य व्यक्ति के बीच हुई आपसी कहासुनी या हथियार की छीनाझपटी के दौरान अचानक चली गोली का परिणाम थी। इस भयानक हादसे में वहां से गुजर रहे एक निर्दोष युवक और एक महिला को छर्रे या गोली लगने से गंभीर जख्म पहुंचे, जिन्हें आनन-फानन में एयरपोर्ट के मेडिकल रूम ले जाया गया और फिर तुरंत अस्पताल रेफर किया गया।
सीआईएसएफ जवान की भूमिका और हथियार से जुड़ी संदिग्ध परिस्थितियां
घटना के केंद्र में तैनात सीआईएसएफ के जवान के पास मौजूद हथियार से गोली चलने के कारणों को लेकर अब कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के उच्चाधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी (Weapon Malfunction) थी जिसके कारण अचानक फायर हो गया, या फिर जवान और किसी यात्री के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोक हुई थी जिसके आवेश में आकर यह हादसा हुआ। सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित जवान को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। एयरपोर्ट जैसे अति-सुरक्षित जोन (High-Security Zone) में जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां सुरक्षाकर्मी की बंदूक से गोली चल जाना और आम नागरिकों का घायल हो जाना सुरक्षा प्रोटोकॉल की एक बड़ी चूक की ओर इशारा करता है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।
घायलों की स्थिति और स्थानीय अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था
इस अप्रत्याशित गोलीबारी की चपेट में आने वाले दोनों घायलों को तुरंत स्थानीय पुलिस और एयरपोर्ट प्रशासन की मदद से वाराणसी के एक बड़े ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उनकी जान खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि उनके शरीर पर आए जख्मों का इलाज जारी है। घटना की खबर मिलते ही घायलों के परिजन भी सदमे में अस्पताल पहुंच गए, और स्थानीय प्रशासन लगातार उनके संपर्क में बना हुआ है। वाराणसी के जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और उन्हें हर संभव चिकित्सा मदद मुहैया कराने का भरोसा दिया है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सुरक्षा बलों और जनता के बीच के इस तरह के तनावपूर्ण हादसे किसी भी निर्दोष की जान के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं।
एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उठाए जाने वाले कड़े कदम
वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण एयरपोर्ट्स में से एक है, जहां से प्रतिदिन देश-विदेश के लिए दर्जनों उड़ानें संचालित होती हैं और हजारों यात्री सफर करते हैं। इस घटना के बाद एयरपोर्ट की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज और मेटल डिटेक्टर्स की जांच प्रक्रिया की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) और सीआईएसएफ के शीर्ष अधिकारी इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जवानों को किस प्रकार की अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक और तकनीकी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। स्थानीय पुलिस भी इस मामले में एफआईआर दर्ज कर चुकी है और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि इस पूरी घटना की हर एक कड़ी को जोड़कर सच सामने लाया जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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