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लास्ट मिनट में AI से तैयार होगा प्रश्नपत्र, खत्म होगा पेपर लीक का खेल; नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स ने दिया बड़ा ब्लूप्रिंट

देशभर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट और विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार टास्क फोर्स ने एक क्रांतिकारी तकनीकी समाधान पेश किया है। परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के प्रमुख और दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि ने स्पष्ट किया है कि पारंपरिक प्रश्नपत्र प्रणाली में मौजूद गंभीर खामियों और संगठित पेपर माफिया द्वारा संचालित आर्थिक लालच को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना अनिवार्य हो चुका है। मंगलवार को सामने आए इस रणनीतिक प्रस्ताव के केंद्र में एक विशाल और सुरक्षित प्रश्न बैंक से परीक्षा के ठीक अंतिम क्षणों में रैंडम आधार पर प्रश्नपत्र संकलित करने की पद्धति शामिल है, ताकि मुद्रण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर होने वाली सेंधमारी की हर गुंजाइश को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

1. पेपर लीक के संगठित नेटवर्क और वित्तीय प्रलोभन पर सीधा प्रहार

देश में जब भी किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का आयोजन होता है, तो लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा होता है। महीनों पहले तैयार किए जाने वाले पारंपरिक मुद्रित प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था चाहे कितनी भी कड़ी क्यों न हो, प्रिंटिंग प्रेस से लेकर स्ट्रांग रूम और वितरण केंद्रों तक पेपर के अवैध व्यापार का एक विशाल आर्थिक संजाल सक्रिय हो जाता है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मंच पर इस जटिल समस्या का विश्लेषण करते हुए नंदन नीलेकणि ने रेखांकित किया कि जब प्रश्नपत्र हफ्तों पहले तैयार होकर विभिन्न प्रशासनिक कड़ियों से गुजरता है, तो बिचौलियों और आपराधिक गिरोहों के भीतर उसे चुराने और करोड़ों रुपये में बेचने का बड़ा वित्तीय लालच पैदा होता है। यदि इस व्यवस्था को बदलकर परीक्षा के निर्धारित समय से ठीक पहले एक विशाल डिजिटल डेटाबेस से स्वचालित विधि द्वारा प्रश्नपत्र संकलित किया जाए, तो किसी भी असामाजिक तत्व के पास पहले से कोई निश्चित प्रश्नपत्र उपलब्ध ही नहीं रहेगा, जिससे पेपर लीक का पूरा अवैध बाजार और आर्थिक आधार ही ध्वस्त हो जाएगा।

2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े प्रश्न बैंक की ताकत से पारदर्शी मूल्यांकन

तकनीकी क्रांति के इस दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका केवल सामान्य ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उच्च सुरक्षा वाली प्रशासनिक प्रणालियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सबसे विश्वसनीय माध्यम बन चुकी है। फोरम में जब यह सीधा सवाल उठाया गया कि क्या आधुनिक एआई उपकरण परीक्षा के दिन ही कुछ मिनटों के भीतर एक निष्पक्ष, संतुलित और त्रुटिहीन प्रश्नपत्र तैयार करने में पूरी तरह सक्षम हैं, तो टास्क फोर्स प्रमुख ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस पर अपनी मुहर लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक विशाल, त्रिस्तरीय और पूर्व-सत्यापित प्रश्न बैंक तैयार किया जा सकता है, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए हजारों उच्च गुणवत्ता वाले प्रश्न शामिल होंगे। परीक्षा शुरू होने से चंद मिनट पहले एल्गोरिदम और एआई की सहायता से अलग-अलग कठिनाई स्तरों को संतुलित करते हुए तुरंत प्रश्नपत्र तैयार होगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी और किसी भी केंद्र तक प्रश्नों के पहले पहुंचने का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

3. कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी और राष्ट्रव्यापी केंद्रों का विस्तार

डिजिटल युग में पारदर्शी चयन प्रक्रिया की दूसरी सबसे मजबूत रीढ़ कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी प्रणाली है। नीलेकणि ने इस बात पर विशेष बल दिया कि देश के दूरदराज इलाकों तक सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित फॉर्मेट में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में देश भर में लगभग 1,50,000 ऐसे डिजिटल केंद्र सक्रिय हैं जहां छात्र-छात्राएं सुरक्षित डिजिटल वातावरण में परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन देश के विशाल भौगोलिक विस्तार और करोड़ों परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए इस बुनियादी ढांचे को कई गुना बढ़ाने की जरूरत है। परीक्षा केंद्रों के इस राष्ट्रीय नेटवर्क को हाई-स्पीड सुरक्षित इंटरनेट, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और सुरक्षित सर्वर कनेक्टिविटी से लैस किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के मेधावी युवाओं को भी बिना किसी तकनीकी बाधा के अपने गृह जिले या नजदीकी कस्बे में पूर्णतः सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण में परीक्षा देने का समान अवसर मिल सके।

4. ढांचागत सुधारों को लागू करने के लिए शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक तत्परता

परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता सीधे तौर पर देश के करोड़ों युवाओं के विश्वास और मनोबल से जुड़ी हुई है। हाल के दिनों में नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के कारण छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच जो मानसिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना, उसने नीति-निर्माताओं को व्यवस्था की बुनियादी ओवरहालिंग करने के लिए प्रेरित किया है। समिति के प्रमुख ने यह साफ संकेत दिया कि टास्क फोर्स केवल सैद्धांतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक और जमीनी सुधारों का ऐसा ढांचा तैयार कर रही है जिसे तुरंत क्रियान्वित किया जा सके। उन्होंने बताया कि समिति के भीतर सिस्टम से जुड़े सभी सूक्ष्म पहलुओं, डेटा एन्क्रिप्शन, साइबर सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों के ऑडिट पर विस्तृत विमर्श चल रहा है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इन सिफारिशों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने तथा परीक्षा सुधारों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए बेहद उत्सुक और प्रतिबद्ध हैं।

लाख टके की बात यह है कि जब तक पुरानी और कमजोर लॉजिस्टिक्स पर आधारित मुद्रित प्रश्नपत्र प्रणाली पर निर्भरता बनी रहेगी, तब तक मानवीय चूक और भ्रष्टाचार के खतरों से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता। नंदन नीलेकणि समिति द्वारा सुझाए गए ये तकनीकी सुझाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डायनामिक पेपर जनरेशन और व्यापक स्तर पर सीबीटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, आने वाले समय में भारत की परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।