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लखनऊ अलीगंज अग्निकांड में पुलिस का बड़ा एक्शन: 500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 4 आरोपी नामजद; फरार सुरेंद्र पर 1 लाख का इनाम घोषित

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित और हृदयविदारक अलीगंज अग्निकांड मामले में पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसी ने बड़ी विधिक कार्रवाई पूरी कर ली है। महीनों की गहन फॉरेंसिक पड़ताल, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के संकलन के बाद जांच अधिकारी ने सक्षम न्यायालय में 500 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, आपराधिक लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या की गंभीर धाराओं के तहत 4 प्रमुख आरोपियों को नामजद किया गया है।

इसके साथ ही, घटना के बाद से लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे मुख्य साजिशकर्ता व फरार आरोपी सुरेंद्र के खिलाफ शिकंजा और कस दिया गया है। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने फरार सुरेंद्र पर घोषित इनाम की राशि को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया है, जिससे राजधानी के आपराधिक व प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

अदालत में पेश की गई 500 से अधिक पन्नों की यह चार्जशीट केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें अग्निकांड से जुड़े हर एक तकनीकी और मानवीय पहलू का बिंदुवार विश्लेषण दर्ज किया गया है। फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट, अग्निशमन विभाग (Fire Department) की टेक्निकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट, बिजली विभाग का लोड एनालिसिस और मौके से बरामद जले हुए तारों व उपकरणों के नमूनों को इस चार्जशीट का मुख्य आधार बनाया गया है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि परिसर में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के बुनियादी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई थीं। न तो वहां वैध फायर एनओसी (Fire NOC) मौजूद थी और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के कोई पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। बेसमेंट और संकरे रास्तों पर ज्वलनशील सामग्री का अवैध भंडारण किया गया था, जिसके चलते आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका।

जांच टीम ने अपनी चार्जशीट में परिसर के मालिकों, प्रबंधकों और संचालन से जुड़े 4 मुख्य जिम्मेदारों को नामजद किया है। इन आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या, जीवन को संकट में डालने वाली घोर लापरवाही, अवैध निर्माण और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के कड़े आरोप लगाए गए हैं।

चार्जशीट में दर्ज चश्मदीदों के बयानों से यह साफ हुआ है कि आग लगने के शुरुआती क्षणों में ही यदि अलार्म बज जाता या अग्निशामक यंत्र चालू हालत में होते, तो इस भीषण त्रासदी को टाला जा सकता था। जांच में यह भी सामने आया कि इमारत में तय सीमा से कई गुना अधिक बिजली का लोड अवैध रूप से खींचा जा रहा था, जिससे मुख्य पैनल बोर्ड में हुए शॉर्ट सर्किट ने भीषण लपटों को जन्म दिया।

इस पूरे अग्निकांड का मुख्य रणनीतिकार और आरोपी सुरेंद्र घटना के दिन से ही भूमिगत है। पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी, कानपुर और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ताबड़तोड़ दबिश दी, लेकिन वह बार-बार अपना ठिकाना और मोबाइल नंबर बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा है।

आरोपी की लगातार फरारी को देखते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने उस पर घोषित इनाम की राशि को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की संस्तुति पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही आरोपी की तलाश के लिए उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और लखनऊ क्राइम ब्रांच की चार विशेष संयुक्त टीमों को मैदान में उतारा गया है। पुलिस ने न्यायालय से आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कराने के साथ ही उसकी संपत्तियों की कुर्की (धारा 82/83) की विधिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

राजधानी लखनऊ का अलीगंज इलाका न केवल एक बड़ा आवासीय केंद्र है, बल्कि कपूरथला, अलीगंज मुख्य चौराहा और पुरनिया से सटा यह क्षेत्र एक विशाल व्यावसायिक केंद्र भी है। अलीगंज अग्निकांड में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद लखनऊ के अन्य प्रमुख व्यापारिक इलाकों—जैसे हजरतगंज, अमीनाबाद, इंदिरानगर, गोमती नगर और आलमबाग—के बेसमेंट व बहुमंजिला इमारतों में चल रहे प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ गई है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), नगर निगम और अग्निशमन विभाग ने संयुक्त रूप से शहर भर में अभियान तेज कर दिया है। उन सभी वाणिज्यिक भवनों, कोचिंग सेंटरों, निजी अस्पतालों और शॉपिंग परिसरों की सूची तैयार की जा रही है जो बिना फायर एग्जिट, बिना वेंटिलेशन और बिना वैध फायर फाइटिंग सिस्टम के संचालित हो रहे हैं। अलीगंज के इस कड़े पुलिस एक्शन से शहर के उन लापरवाह भवन स्वामियों में भय का माहौल है जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कॉमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस भीषण अग्निकांड में अपने प्रियजनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों और घायलों ने राहत की सांस ली है, लेकिन उनका कहना है कि असली न्याय तभी मिलेगा जब सभी दोषियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलेगी। पीड़ित परिवारों ने राज्य सरकार और न्यायपालिका से अपील की है कि इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में दैनिक आधार पर कराई जाए।

स्थानीय नागरिक संगठनों और अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक फरार सुरेंद्र की गिरफ्तारी नहीं होती और नामजद आरोपियों को कठोर सजा नहीं मिलती, तब तक भविष्य में ऐसे लापरवाह संचालकों के लिए कोई कड़ा संदेश नहीं जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अदालत में मजबूत पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) की नियुक्ति की जा रही है ताकि आरोपियों को किसी भी तकनीकी खामी का लाभ न मिल सके।