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रेलवे का बड़ा कमाल: बुलेट ट्रेन से पहले सेमी-हाई स्पीड ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ने पकड़ी 180 किमी/घंटे की तूफानी रफ्तार, राजधानी और शताब्दी को मिल रही कड़ी टक्कर

नई दिल्ली। भारतीय रेल के इतिहास में आधुनिकता, गति और स्वदेशी तकनीक का एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश में जहां एक तरफ मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटरियों पर पहले से दौड़ रही भारतीय रेलवे की स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ने ट्रायल के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे (180 kmph) की अधिकतम रफ्तार का मील का पत्थर पार कर सभी को चौंका दिया है।

रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन (RDSO) और रेलवे की तकनीकी टीमों द्वारा किए गए परीक्षणों में ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की गति पर भी उत्कृष्ट स्थिरता, न्यूनतम कंपन और विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों का प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साफ कर दिया है कि देश का सामान्य ब्रॉड-गेज नेटवर्क अब वैश्विक स्तर की हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन करने में पूरी तरह सक्षम हो रहा है। देश की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों—राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस—के वर्चस्व को अब वंदे भारत सीधे तौर पर चुनौती दे रही है, जिससे इंटरसिटी और लंबी दूरी के सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

पारंपरिक राजधानी या शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में आगे एक भारी-भरकम लोकोमोटिव (इंजन) लगा होता है, जो पूरी ट्रेन के डिब्बों को खींचता है। इस व्यवस्था के कारण ट्रेन को अपनी अधिकतम गति पकड़ने (एक्सेलरेशन) और रुकने (डीसेलरेशन) में काफी समय लगता है। इसके विपरीत, वंदे भारत एक्सप्रेस ‘सेल्फ-प्रोपेल्ड’ या डिस्ट्रीब्यूटेड पावर तकनीक (Distributed Power EMU Technology) पर काम करती है।

इस तकनीक के प्रमुख फायदे:

  1. रॉकेट जैसा एक्सेलरेशन: वंदे भारत महज 52 सेकंड में शून्य से 100 किमी/घंटे की रफ्तार पकड़ने में सक्षम है, जो कई बुलेट ट्रेनों और हाई-स्पीड स्पोर्ट्स कारों के बराबर है। राजधानी एक्सप्रेस को यही गति पकड़ने में लगभग दो से तीन गुना समय लगता है।

  2. एयरोडायनामिक नोज कोन: ट्रेन का अगला हिस्सा बुलेट ट्रेन की तरह सुव्यवस्थित और एयरोडायनामिक है, जिससे हवा के प्रतिरोध (Air Drag) में भारी कमी आती है और कम बिजली की खपत में ट्रेन 180 किमी/घंटा तक की गति को आसानी से छू लेती है।

  3. एडवांस्ड रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ब्रेक लगाने पर ऊर्जा बर्बाद नहीं होती, बल्कि बिजली ग्रिड में वापस फीड होती है, जिससे ट्रेन लगभग 30% ऊर्जा की बचत करती है।

जब ट्रेन ने 180 किमी/घंटे की गति का आंकड़ा छुआ, तो केबिन के भीतर किए गए ‘ग्लास ऑफ वाटर’ टेस्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। पूरी रफ्तार पर दौड़ते हुए भी टेबल पर रखे पानी के गिलास से पानी की एक बूंद बाहर नहीं छलकी। यह इसकी उन्नत सेमी-एक्टिव बोगी सस्पेंशन और सुपीरियर राइड इंडेक्स का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

राजधानी और शताब्दी के मुकाबले यात्रियों को मिल रही आधुनिक सुविधाएं:

  • कवच सुरक्षा प्रणाली (KAVASCH Safety): ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ से लैस है, जो मानवीय भूल होने पर एक ही ट्रैक पर आमने-सामने से आ रही दो ट्रेनों को अपने आप ब्रेक लगाकर रोक देती है।

  • एग्जीक्यूटिव क्लास में 180-डिग्री रिवॉल्विंग सीट्स: एग्जीक्यूटिव चेयर कार में सीटें ट्रेन की चलने की दिशा में घूम जाती हैं, जो राजधानी या शताब्दी में उपलब्ध नहीं है।

  • हवाई जहाज जैसा केबिन और बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स: ट्रेन में पूरी तरह सीलबंद गैंगवे, बदबू-मुक्त बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स, टच-फ्री सेंसर्स और हर कोच में सीसीटीवी कैमरे, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम व वाई-फाई इन्फोटेनमेंट स्क्रीन मौजूद हैं।

ट्रेन भले ही 180 किमी/घंटा चलने में सक्षम हो, लेकिन नियमित कॉमर्शियल परिचालन में इसे 130 से 160 किमी/घंटा के बीच चलाया जाता है। पटरियों की मौजूदा सीमा को दूर करने के लिए रेलवे बोर्ड ने मिशन 160+ के तहत ट्रैक अपग्रेडेशन का महा-अभियान शुरू किया है:

  • दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट: इन दोनों व्यस्ततम गोल्डन क्वाड्रिलेटरल रूट्स को 160 किमी/घंटे की गति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए ट्रैक के दोनों किनारों पर मजबूत फेंसिंग (चारदीवारी) की जा रही है ताकि मवेशी या लोग ट्रैक पर न आ सकें।

  • ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और थिक-वेब स्विचेस: पटरियों पर पुराने जंक्शन प्वाइंट्स को बदलकर आधुनिक थिक-वेब स्विचेस लगाए जा रहे हैं, जिससे ट्रेनें मोड़ों पर भी बिना गति घटाए आसानी से निकल सकें।

वंदे भारत के इस तीव्र विस्तार और लगातार बेहतर होते स्पीड रिकॉर्ड्स ने भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भरता के उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां आने वाले वर्षों में देश का हर कोना हाई-स्पीड, सुरक्षित और आरामदायक कनेक्टिविटी से जुड़ने जा रहा है।