यूपी ने रचा नया इतिहास: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 40 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य पूरा, सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को लिखी भावुक चिट्ठी

उत्तर प्रदेश ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 40 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य हासिल कर नया कीर्तिमान बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को पत्र लिखकर बधाई दी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राज्य ने 40 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य पूरा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पत्र लिखकर उन्हें बधाई दी और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया। उन्होंने इसे केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का महाअभियान बताया।

सीएम योगी ने पत्र लिखकर दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि ‘वृक्षारोपण महायज्ञ-2026’ के अंतर्गत चलाए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में उत्तर प्रदेश ने 40 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य हासिल कर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ‘नए भारत’ के ‘नए उत्तर प्रदेश’ की सामूहिक शक्ति, जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने अभियान की सफलता के लिए प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की मजबूत नींव है।

पर्यावरण संरक्षण को बताया जनआंदोलन

सीएम योगी ने अपने पत्र में कहा कि यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, जीवन संरक्षण और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दें और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी करें।

उन्होंने कहा कि हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह धरती को अधिक हराभरा बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्व

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का विकास वनों से हुआ है, इसलिए इसे ‘अरण्य संस्कृति’ भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि वेद, उपनिषद और अनेक महान ग्रंथों की रचना वनों में हुई, जहां ऋषि-मुनियों ने लोककल्याण के लिए चिंतन और साधना की।

उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्र, पुराण और परंपराएं मानव जीवन के प्रत्येक संस्कार में वृक्षों के महत्व को स्वीकार करती हैं। आयुर्वेद के अनुसार पृथ्वी पर ऐसा कोई पौधा नहीं है जिसमें औषधीय गुण न हों। ऋग्वेद में भी पृथ्वी और वृक्षों के गहरे संबंध का विस्तार से वर्णन मिलता है।

गीता और पुराणों में भी वृक्षों का गौरव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है—”वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं।” इसके अलावा महाभारत और विभिन्न पुराणों में पीपल, वट, आंवला, बेल, परिजात सहित अनेक वृक्षों को विशेष महत्व दिया गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू किया गया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश और उत्तर प्रदेश की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुका है। इस अभियान ने जनभागीदारी के माध्यम से हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।