
देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच एक बड़ा चुनावी ओपिनियन पोल सामने आ गया है। न्यूज लीडर और प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी मैटराइज द्वारा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर किए गए व्यापक जनमत सर्वेक्षण ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक मूड को उजागर कर दिया है। पिछले नौ वर्षों से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को लेकर जनता की राय सामने आई है। इस सर्वे के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के लिए भारी बहुमत और प्रचंड जीत का अनुमान जताया है।
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, यदि राज्य में आज विधानसभा चुनाव आयोजित कराए जाते हैं, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 267 सीटों के विशाल आंकड़े के साथ पूर्ण बहुमत से लगातार तीसरी बार सरकार बनाता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के नेतृत्व वाला गठबंधन केवल 132 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) और अन्य छोटे दलों की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई दे रही है, जहां मायावती की पार्टी को केवल 2 सीटें और अन्य निर्दलीय व गैर-गठबंधन दलों को 2 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।
मैटराइज के इस सर्वे में एनडीए गठबंधन के भीतर घटक दलों की सीटों का विस्तृत ब्योरा भी प्रस्तुत किया गया है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 202 सीटों का है, लेकिन सर्वे के अनुसार भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों के बिना भी अकेले दम पर 246 सीटें जीतने की स्थिति में नजर आ रही है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सत्ता विरोधी लहर की चर्चाओं के विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक छवि और विकास योजनाओं की पकड़ मतदाताओं के बीच अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है।
गठबंधन के अन्य सहयोगियों की बात करें तो अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (सोनेलाल) को 9 सीटें मिलने का अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को 3 सीटें, संजय निषाद की निषाद पार्टी को 4 सीटें और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को 1 सीट मिलती दिख रही है। यह गठबंधन संतुलन दिखाता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी यूपी के जाट बेल्ट और रुहेलखंड तक एनडीए अपने सामाजिक समीकरणों को एकजुट रखने में काफी हद तक सफल होता दिखाई दे रहा है।
दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए यह सर्वे काफी निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है। सर्वे के अनुसार सपा गठबंधन को राज्य भर में महज 132 सीटें मिलती दिख रही हैं। यदि चुनावी परिणाम इस सर्वे के अनुरूप रहते हैं, तो यह अखिलेश यादव के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा, क्योंकि 2017 और 2022 के बाद उन्हें लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। 2012 से 2017 तक राज्य की कमान संभालने वाली समाजवादी पार्टी इस बार अकेले 125 सीटें जीतने का अनुमान दिखा रही है, जो पिछले 2022 के चुनाव की 111 सीटों से मामूली बढ़त जरूर है, लेकिन सत्ता की दहलीज से बहुत दूर है।
वहीं सपा की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस पार्टी को गठबंधन के तहत सिर्फ 7 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। चुनाव नजदीक आते ही सपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग और स्थानीय प्रभाव को लेकर अंदरूनी खींचतान भी सार्वजनिक होने लगी है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार मुखर बयानबाजी कर रहे हैं, जिसका जवाब कैराना से सपा सांसद इकरा हसन समेत कई सपा नेता तीखे अंदाज में दे रहे हैं। दोनों दलों के बीच का यह जमीनी टकराव जमीनी कैडर के समन्वय को प्रभावित कर रहा है, जिसका सीधा असर सर्वे के आंकड़ों में साफ झलक रहा है।
चुनावी राजनीति में सीटों की संख्या के साथ-साथ वोट शेयर सबसे प्रामाणिक पैमाना माना जाता है। मैटराइज के सर्वे के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को पूरे उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी गठबंधन को करीब 38 फीसदी वोट मिल सकता है। दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के बीच 6 फीसदी का भारी अंतर दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और बहुकोणीय राजनीति वाले राज्य में 6 प्रतिशत का वोट अंतर नतीजों में जमीन-आसमान का फर्क पैदा करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
वहीं एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति की धुरी रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए यह सर्वे अस्तित्व का संकट पेश करता है। मायावती की बसपा का वोट शेयर गिरकर महज 0.8 फीसदी के आसपास सिमटता दिख रहा है, जिससे साफ है कि पार्टी का पारंपरिक कैडर अन्य विकल्पों की ओर स्थानांतरित हो चुका है। अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में करीब 10 फीसदी वोट शेयर जाने का अनुमान है, जो स्थानीय स्तर पर कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की हालिया चुनावी पृष्ठभूमि को समझें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर 41.3 फीसदी रहा था। उस चुनाव में उसके सहयोगी अपना दल (एस) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिली थीं। वहीं समाजवादी पार्टी को 111 सीटें और 32.1 फीसदी वोट शेयर हासिल हुआ था, जबकि बसपा महज 1 सीट और 12.9 फीसदी वोट शेयर पर सिमट गई थी और कांग्रेस केवल 2 सीटें जीत सकी थी।
इससे पहले 2017 के चुनाव में मोदी लहर के बीच भाजपा ने 312 सीटें और 39.7 फीसदी वोट शेयर हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय सपा को 47 सीटें, बसपा को 19 सीटें और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। यानी 2017 से 2022 के बीच भाजपा की सीटों में 57 की कमी आई थी, लेकिन उसका वोट शेयर करीब 1.6 प्रतिशत बढ़ गया था। इसके विपरीत सपा ने सीटों में 64 का इजाफा किया था और अपने वोट शेयर में करीब 10 प्रतिशत की छलांग लगाई थी। ताजा 2026 के सर्वे के मुताबिक भाजपा अपना वोट शेयर 41.3 से बढ़ाकर 44 फीसदी तक ले जाती दिख रही है, जिससे सीटों की संख्या फिर से 267 तक पहुंचती नजर आ रही है।
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