म्यूचुअल फंड में नॉमिनी न होने पर भी नहीं डूबता पैस,: ट्रांसमिशन प्रोसेस समझना जरूरी

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते समय हमेशा नॉमिनेशन (Nomination) दर्ज कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कई बार अनजाने में या पुराने फोलियो में निवेशक नॉमिनी का नाम दर्ज करना भूल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यदि मूल निवेशक (Unitholder) की अचानक मृत्यु हो जाती है, तो परिवार के सदस्यों के मन में सबसे बड़ा डर यह होता है कि क्या उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा डूब जाएगा? वित्तीय नियामक सेबी (SEBI) और म्यूचुअल फंड एसोसिएशन (AMFI) के नियमों के अनुसार, निवेशक का पैसा कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है। नॉमिनी न होने की स्थिति में म्यूचुअल फंड यूनिट्स को कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) के नाम पर ट्रांसफर करने की एक सुव्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ट्रांसमिशन ऑफ यूनिट्स’ (Transmission of Units) कहा जाता है।

प्रक्रिया शुरू करने से पहले नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी के अंतर को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। कानून की नजर में नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है, जिसका काम निवेशक की मृत्यु के बाद फंड को सुरक्षित प्राप्त करना और असली कानूनी वारिसों तक पहुंचाना होता है। यदि निवेशक ने कोई नॉमिनी नहीं बनाया था, तो निवेशक की वसीयत (Will) अथवा उत्तराधिकार कानून (Hindu Succession Act, Indian Succession Act आदि) के तहत आने वाले प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस (जैसे पति/पत्नी, बच्चे और माता) उस जमा पूंजी के असली हकदार बनते हैं। यदि निवेशक ने वैध वसीयत छोड़ी है, तो प्रक्रिया काफी सरल हो जाती है; वहीं बिना वसीयत (Intestate) की स्थिति में कानूनी वारिसों को आपसी सहमति और जरूरी हलफनामों के जरिए दावा पेश करना होता है।

सेबी और फंड हाउसेज ने छोटे निवेशकों के परिजनों की सुविधा के लिए क्लेम प्रक्रिया को दो स्लैब में बांटा हुआ है। यदि सभी फोलियो को मिलाकर कुल निवेश का मूल्य 5 लाख रुपये (कुछ फंड हाउस में 2 लाख रुपये) तक है, तो जटिल अदालती दस्तावेजों के बिना भी क्लेम प्रोसेस पूरा हो जाता है। इसके लिए परिवार को निम्नलिखित दस्तावेज एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या रजिस्ट्रार जैसे CAMS / KFintech के पास जमा करने होते हैं:

  • ट्रांसमिशन अनुरोध फॉर्म (Form T3): सभी कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित आवेदन पत्र।

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): मूल निवेशक के मृत्यु प्रमाण पत्र की नोटराइज्ड या सत्यापित प्रति।

  • केवाईसी और बैंक प्रमाण: दावा करने वाले कानूनी वारिस का पैन कार्ड, आधार कार्ड, नई केवाईसी और कैंसिल्ड चेक।

  • क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond): गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर सभी कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित क्षतिपूर्ति पत्र।

  • अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) / त्याग पत्र: यदि एक से अधिक कानूनी वारिस हैं और पैसा किसी एक के खाते में जाना है, तो बाकी वारिसों की नोटराइज्ड एनओसी।

यदि निवेशक के म्यूचुअल फंड फोलियो की कुल मार्केट वैल्यू 5 लाख रुपये से अधिक है और कोई नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो फंड हाउस सुरक्षा कारणों से अधिक पुख्ता कानूनी प्रमाण मांगते हैं। ऐसी स्थिति में कानूनी वारिसों को नीचे दिए गए तीन दस्तावेजों में से कोई एक मुख्य प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है:

  • उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate): सक्षम सिविल कोर्ट द्वारा जारी किया गया उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, जिसमें संबंधित म्यूचुअल फंड यूनिट्स या चल संपत्ति का स्पष्ट उल्लेख हो।

  • प्रोबेट ऑफ विल (Probate of Will): यदि निवेशक ने वसीयत बनाई थी, तो अदालत द्वारा प्रमाणित और स्वीकृत वसीयत की प्रति।

  • प्रशासन पत्र (Letter of Administration): यदि कोई विवाद हो, तो अदालत द्वारा नियुक्त संपत्ति प्रशासक का आधिकारिक आदेश।

इन अदालती आदेशों के साथ-साथ वारिसों को अपने केवाईसी दस्तावेज, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण और फॉर्म टी3 जमा कराना होता है।

ट्रांसमिशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कानूनी उत्तराधिकारियों को एक व्यवस्थित क्रम में आगे बढ़ना चाहिए:

  • चरण 1 – सभी फोलियो और सीएएस (CAS) की पहचान: सबसे पहले मृत निवेशक के पैन नंबर के जरिए CAMS, KFintech या NSDL/CDSL से कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) डाउनलोड करें ताकि सभी सक्रिय म्यूचुअल फंड योजनाओं की सटीक जानकारी मिल सके।

  • चरण 2 – नया बैंक खाता और केवाईसी (KYC): दावा करने वाले कानूनी वारिस के पास एक सक्रिय एकल बैंक खाता (Single Bank Account) और अपडेटेड केवाईसी होनी चाहिए, क्योंकि ट्रांसमिशन के बाद यूनिट्स केवल वारिस के नए फोलियो में क्रेडिट होती हैं।

  • चरण 3 – आवेदन जमा करना: सभी आवश्यक मूल हलफनामे, स्टैम्प्ड बांड, मृत्यु प्रमाण पत्र और फॉर्म संबंधित फंड हाउस के नजदीकी आधिकारिक सेवा केंद्र (POS) या CAMS/KFintech के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जमा करें।

  • चरण 4 – यूनिट्स का ट्रांसफर और रिडेम्पशन: दस्तावेजों के सत्यापन के बाद (जिसमें आमतौर पर 15 से 30 कार्यदिवस लगते हैं), यूनिट्स मृतक के नाम से हटकर कानूनी वारिस के फोलियो में ट्रांसफर हो जाती हैं। इसके बाद वारिस चाहें तो उन यूनिट्स को निवेशित रख सकते हैं या उन्हें रिडीम (Redeem) करके सीधे अपने बैंक खाते में नकदी प्राप्त कर सकते हैं।

अदालती प्रक्रियाओं, स्टांप पेपर और वकीलों की भागदौड़ से अपने परिवार को बचाने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका यह है कि प्रत्येक म्यूचुअल फंड फोलियो और डीमैट अकाउंट में समय रहते नॉमिनी अवश्य जोड़ें। आज लगभग सभी म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म्स, फंड हाउस की वेबसाइट्स और CAMS/KFintech पोर्टल्स पर ओटीपी (OTP) आधारित ऑनलाइन ई-साइन के माध्यम से मात्र 2 मिनट में 3 नॉमिनी तक जोड़े जा सकते हैं। समय पर किया गया एक छोटा सा प्रयास विपरीत परिस्थितियों में आपके परिजनों को अनावश्यक कानूनी व वित्तीय उलझनों से पूरी तरह सुरक्षित रखता है।