
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से मेटा (Meta), गूगल (Google) और यूट्यूब (YouTube) के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भारत विरोधी (एंटी-इंडिया) सामग्री और फर्जी एजेंडे को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से बिना शर्त माफी की मांग की है।
संसदीय समिति की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में निशिकांत दुबे ने चेताया कि यदि मार्क जुकरबर्ग ने इस मामले में व्यक्तिगत रूप से माफी नहीं मांगी, तो भारत सरकार उनके प्लेटफॉर्म से आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा वापस ले सकती है।
एल्गोरिदम का खेल: ‘एंटी-इंडिया’ कंटेंट को बढ़ावा देने का आरोप
निशिकांत दुबे ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां जानबूझकर ऐसा सिस्टम चला रही हैं जिससे देश की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तुलना में असामाजिक, असंतोष फैलाने वाले और एंटी-इंडिया कंटेंट की रीच (Reach) ज्यादा बढ़ती है।
उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि जहां भारत की प्रमुख पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों की कुल व्यूअरशिप सीमित रह जाती है, वहीं देश में अराजकता फैलाने वाले और रातों-रात बने अनरजिस्टर्ड ग्रुप्स के कंटेंट को करोड़ों में व्यूअरशिप दी जा रही है। उन्होंने इसे देश को अस्थिर करने का एक बड़ा प्रयास करार दिया।
प्रमुख बिंदु: निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया कि भारत के कड़े कानूनों के बावजूद सोशल मीडिया कंपनियां गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी कर रही हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर बवाल: ‘तकनीकी खराबी’ की दलील खारिज
विवाद की सबसे बड़ी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आधिकारिक वीडियो का फेसबुक से अचानक गायब होना बनी। यह वीडियो युवाओं से जुड़े पेपर लीक मुद्दे पर सख्त कार्रवाई का संदेश दे रहा था, जिसे मेटा ने करीब 5 घंटे (रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक) के लिए हटा दिया था।
हालाँकि मेटा अधिकारियों ने संसदीय समिति के सामने पेश होकर इसे एक एल्गोरिद्मिक त्रुटि (technical glitch) बताते हुए खेद जताया, लेकिन समिति ने इस सफाई को सिरे से खारिज कर दिया। दुबे ने कहा कि अगर भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो सुरक्षित नहीं है और 5 घंटे तक गायब रहता है, तो यह साधारण चूक नहीं बल्कि देश की संप्रभुता से जुड़ा मामला है।
अश्लील कंटेंट और साइबर अपराध पर भी तल्ख रुख
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा बच्चों से जुड़े यौन शोषण कंटेंट (CSAM), महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री और डीपफेक (Deepfake) पर कोई सख्त एक्शन न लेने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
निशिकांत दुबे ने कहा कि एक तरफ वास्तविक और प्रो-इंडिया पेजों को बिना वजह रिस्ट्रिक्ट या ब्लॉक कर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अश्लील और हानिकारक कंटेंट प्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम घूमता रहता है। समिति ने मेटा से 10 दिनों के भीतर इस पूरे घटनाक्रम और अपनी पॉलिसी पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
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