
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम इंडिया मैनेजमेंट ने अपनी रणनीतिक तैयारियों को और अधिक धार देते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है, जिसे भारतीय क्रिकेट का ‘प्लान B’ कहा जा रहा है। आमतौर पर विदेशी दौरों या बड़े टूर्नामेंट्स के अभ्यास के लिए टीम के साथ सीमित संख्या में नेट बॉलर्स भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार श्रीलंका दौरे या आगामी अहम श्रृंखला के लिए सामान्य नियमों से हटकर 2 की जगह सीधे 4 नेट बॉलर्स भेजने का फैसला किया गया है। चयनकर्ताओं और कोचिंग स्टाफ के इस अचानक बदले हुए फैसले के बाद क्रिकेट गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि आखिर इस रणनीति के पीछे टीम इंडिया का मुख्य मकसद क्या है।
नेट बॉलर्स की संख्या दोगुनी करने के पीछे क्या है टीम मैनेजमेंट की रणनीति?
भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ और हेड कोच द्वारा खिलाड़ियों के वर्कलोड और अभ्यास की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए यह मास्टरस्ट्रोक चला गया है। आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों की फिटनेस और अलग-अलग परिस्थितियों में बल्लेबाजों-गेंदबाजों को परखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यही वजह है कि नेट सेशन के दौरान मुख्य खिलाड़ियों को किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े और उन्हें वैरायटी से भरपूर गेंदबाजी का सामना करने का मौका मिले, इसलिए बैकअप के तौर पर चार गेंदबाजों को तैयार रखने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से टीम के मुख्य बल्लेबाजों को अभ्यास के दौरान हर तरह की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी।
एशियन कंडिशंस और भविष्य की तैयारियों पर टिकी हैं निगाहें
श्रीलंका या इसी तरह की अन्य एशियाई पिचों पर स्पिन और सीम स्विंग दोनों का सामना करना बल्लेबाजों के लिए बड़ी परीक्षा होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अतिरिक्त सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। इस फैसले से साफ जाहिर होता है कि टीम इंडिया इस बार किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है और हर मोर्चे पर मुकम्मल तैयारी के साथ मैदान पर उतरना चाहती है। युवा गेंदबाजों को भी इस बड़े मंच पर इंटरनेशनल स्टार्स के साथ नेट प्रैक्टिस करने का अमूल्य अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य के लिए भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ और अधिक मजबूत होकर उभरेगी।
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