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मानसून की विदाई के बाद फिर बिगड़ेगी दिल्ली की आबोहवा! जानिए आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम और बढ़ेगा प्रदूषण का स्तर

राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई की प्रक्रिया शुरू होते ही मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार हो रही बारिश के चलते दिल्लीवासियों को जिस साफ नीले आसमान और ताजी हवा का अहसास हो रहा था, वह राहत अब धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून ट्रफ के पीछे हटने और उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं के सक्रिय होने से बारिश का दौर पूरी तरह थम गया है। बारिश रुकने के साथ ही वातावरण में मौजूद नमी और दिन के तेज धूप के कारण जहां दोपहर में हल्की उमस भरी गर्मी का असर दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुबह और देर रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जाने लगी है। लेकिन इस मौसमी बदलाव के साथ दिल्ली-एनसीआर के लिए हर साल की सबसे बड़ी चुनौती यानी वायु प्रदूषण (Air Pollution) का साया एक बार फिर मंडराने लगा है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, आगामी सप्ताह के दौरान दिल्ली में आसमान मुख्य रूप से साफ और मौसम शुष्क बना रहेगा। अधिकतम तापमान 34 डिग्री से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर 23 से 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

हवा की दिशा अब दक्षिण-पूर्वी से बदलकर उत्तर-पश्चिमी (North-Westerly) होने लगी है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं की यह दिशा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मैदानी इलाकों से होकर राष्ट्रीय राजधानी की ओर आती है। अक्टूबर की शुरुआत तक दिन में धूप तेज रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे रातें ठंडी होंगी, तापमान का यह अंतर हवा की गति को धीमा कर देगा, जिससे वातावरण में ‘थर्मल इन्वर्जन’ (Thermal Inversion) की स्थिति बननी शुरू हो जाएगी।

मानसून की विदाई और सर्दियों की आहट के बीच दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे मुख्य रूप से मौसम विज्ञान और मौसमी गतिविधियों का गठजोड़ काम करता है:

  • हवा की रफ्तार में कमी: बारिश के मौसम में तेज मानसूनी हवाएं धूल और धुएं के कणों को उड़ा ले जाती हैं, लेकिन विदाई के बाद सतही हवा की गति बेहद धीमी (शांत या मंद) हो जाती है। हवा न चलने से स्थानीय स्तर पर निकलने वाला धुआं एक ही जगह ठहर जाता है।

  • मिक्सिंग हाइट का गिरना: रात के पारे में गिरावट आने से वातावरण की निचली सतह ठंडी हो जाती है और हवा का फैलाव रुक जाता है। इसे वातावरण की मिक्सिंग हाइट घटना कहा जाता है, जिससे प्रदूषण के कण जमीन से कुछ सौ मीटर ऊपर ही एक अदृश्य चादर की तरह फंस जाते हैं।

  • पराली जलाने का सीजन: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के बाद खेतों में पराली (Stubble Burning) जलाने की शुरुआत हो जाती है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं इस धुएं को सीधे दिल्ली के वायुमंडल में खींच लाती हैं।

  • स्थानीय प्रदूषण स्रोत: निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल (Road Dust), वाहनों का उत्सर्जन (Vehicular Emission) और कचरा जलाने से निकलने वाले प्रदूषक तत्व बारिश न होने की स्थिति में सीधे हवा में जहर घोलने लगते हैं।

वर्तमान में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘मध्यम’ (Moderate) से ‘खराब’ (Poor) श्रेणी यानी 100 से 150 के दायरे में दर्ज किया जा रहा है। आनंद विहार, वजीरपुर, मुंडका, बवाना और जहांगीरपुरी जैसे हॉटस्पॉट्स पर पीएम2.5 (PM2.5) और पीएम10 (PM10) का स्तर सामान्य सीमा से दोगुना दर्ज होने लगा है।

सफर (SAFAR) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक दिल्ली का एक्यूआई ‘खराब’ (200 से ऊपर) और अक्टूबर के अंत तक ‘बेहद खराब’ (Very Poor – 300 के पार) श्रेणी में प्रवेश कर सकता है। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू करने की तैयारी में जुट गया है, जिसके तहत धूल नियंत्रण और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाता है।

आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता खराब होने से बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी (अस्थमा व ब्रोंकाइटिस) से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। सुबह के समय जब स्मॉग की परत जमीन के सबसे करीब होती है, तब आउटडोर जॉगिंग या भारी एक्सरसाइज करने से बचें। घर से बाहर निकलते समय एन95 (N95) मास्क का उपयोग शुरू करें और घर की खिड़कियों को तेज ट्रैफिक वाले समय पर बंद रखें। पानी का पर्याप्त सेवन करें ताकि गले और फेफड़ों में जमा धूल के कणों से होने वाली एलर्जी से बचा जा सके।