मानसून का ‘सुपर अलर्ट’: असम से गुजरात तक बाढ़ का तांडव, जानिए इस वीकेंड दिल्ली, यूपी, राजस्थान समेत आपके शहर में कैसा रहेगा मौसम?

देश भर में मानसून अपने विकराल और उग्र रूप में पहुंच चुका है। पूर्वोत्तर राज्य असम से लेकर पश्चिमी भारत के गुजरात तक नदियां उफान पर हैं और कई जिले जलमग्न हो चुके हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी वीकेंड के लिए देश के कई राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश, वज्रपात और बाढ़ का ‘सुपर अलर्ट’ जारी किया है। एक ओर जहां मैदानी इलाकों में जलभराव और सड़कों पर सैलाब जैसी स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

असम और पूर्वोत्तर में नदियां उफान पर, लाखों लोग प्रभावित

पूर्वोत्तर भारत में बीते कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे असम के चराईदेव, शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट और डिब्रूगढ़ जैसे जिलों के सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इस वीकेंड भी पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम और मेघालय में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने और नई जगहों पर कटान होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

गुजरात और महाराष्ट्र में बाढ़ जैसे हालात, सौराष्ट्र और कोंकण पर सबसे ज्यादा मार

पश्चिम भारत में मानसूनी चक्रवाती हवाओं के दबाव (Cyclonic Circulation) के कारण गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में कुदरत का कहर जारी है। गुजरात के सौराष्ट्र, कच्छ और दक्षिणी हिस्सों में बीते दिनों हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद नदियों और बांधों का जलस्तर चरम पर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि इस वीकेंड भी गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में तेज हवाओं (40 से 50 किमी प्रति घंटा) के साथ लगातार बारिश होने की संभावना जताई गई है। मुंबई, ठाणे, पालघर और रत्नागिरी में वीकेंड पर यातायात बाधित होने और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

उत्तर भारत में मॉनसून ट्रफ एक्टिव: दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार का हाल

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मानसूनी ट्रफ रेखा के सक्रिय होने के कारण मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव और फरीदाबाद में इस वीकेंड हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को उमस से राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में चक्रवाती परिसंचरण का असर देखा जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा समेत राज्य के अधिकांश जिलों में वीकेंड के दौरान रुक-रुक कर भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार और झारखंड में भी मानसून की ट्रफ लाइन के प्रभाव से कई स्थानों पर वज्रपात और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे किसानों को धान की फसल में लाभ होगा लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या खड़ी हो सकती है।

पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बादल फटने का खतरा: हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून इस समय काल बनकर बरस रहा है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां-नाले उफान पर हैं और दर्जनों राष्ट्रीय राजमार्ग और संपर्क सड़कें भूस्खलन (Landslides) तथा मलबे के कारण बंद हो चुकी हैं। मौसम विभाग (IMD) ने शिमला, कुल्लू, मनाली, कांगड़ा, मंडी, देहरादून, नैनीताल, उत्तरकाशी और चमोली जैसे संवेदनशील जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वीकेंड पर इन पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और अचानक बाढ़ (Flash Floods) आने का जोखिम बेहद अधिक है। जम्मू-कश्मीर के डोडा, किश्तवाड़, कठुआ और उधमपुर में भी बारिश और पहाड़ खिसकने की घटनाओं को देखते हुए यात्रियों तथा पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा न करने और नदी तटों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

मध्य और मध्य-पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में भारी वर्षा की चेतावनी

मध्य भारत में एक्टिव मानसून सिस्टम के चलते मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और ओडिशा में भारी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे चंबल, नर्मदा और बेतवा जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, भोपाल और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में वीकेंड के दौरान तेज गर्जना के साथ बारिश होने का अनुमान है। ओडिशा में बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के प्रभाव से तटीय और आंतरिक जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे राज्य के निचले हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

दक्षिण भारत: केरल और कर्नाटक में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

दक्षिण भारत के राज्यों में भी मानसूनी हवाएं काफी उग्र नजर आ रही हैं। केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के जिलों में मौसम विभाग ने भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अरब सागर से आ रही तेज पछुआ हवाओं के कारण तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे समुद्र के गहरे पानी में न जाएं। केरल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है और पर्यटकों के आवागमन को नियंत्रित किया जा रहा है।

मानसूनी आफत से बचाव के लिए प्रशासन और आईएमडी के सुरक्षा दिशानिर्देश

मौसम के इस उग्र और जोखिम भरे मिजाज को देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRF/SDRF) और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आम जनता के लिए सुरक्षा एडवायजरी जारी की है:

  • जलभराव और नदी तटों से दूर रहें: जिन इलाकों में नदियां और नाले उफान पर हैं, वहां जाने से बचें। जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाने से परहेज करें।

  • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे शरण न लें: आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के दौरान खुले में खड़े होने या बड़े पेड़ों व लोहे के खंभों के पास रुकने से बचें, क्योंकि वज्रपात का खतरा हो सकता है।

  • पहाड़ी यात्राएं टालें: यदि आपकी योजना इस वीकेंड हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड या जम्मू-कश्मीर जाने की है, तो भूस्खलन और बंद रास्तों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा को स्थगित कर दें।

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अनप्लग करें: तेज बिजली कड़कने के दौरान घरों में बिजली के संवेदनशील उपकरणों को प्लग से निकाल दें।

  • मौसम अपडेट पर नजर रखें: यात्रा पर निकलने से पहले आईएमडी (IMD) या स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए ताजा वेदर बुलेटिन को अवश्य चेक करें।

इस प्रकार, इस वीकेंड देश के लगभग दो-तिहाई हिस्से में मानसून का असर बहुत तेज रहने वाला है। असम से लेकर गुजरात और पहाड़ों से लेकर मैदानों तक, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा माध्यम है।