
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। हेट स्पीच (नफरती भाषण) से जुड़े एक चर्चित मामले में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मोइत्रा द्वारा दायर याचिका पर विचार या सुनवाई करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद महुआ मोइत्रा की कानूनी टीम को राहत पाने के लिए अन्य कानूनी रास्तों पर निर्भर होना पड़ेगा, जिससे उनकी तत्कालीन मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
शीर्ष अदालत का सख्त रुख: जानिए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को इस स्तर पर सीधे सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने के बजाय कानून के तहत उपलब्ध अन्य निचले अदालती विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए। पीठ ने सुनवाई के दौरान प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला देते हुए याचिका पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। महुआ मोइत्रा पर कथित तौर पर दिए गए एक बयान को लेकर हेट स्पीच के तहत कानूनी कार्रवाई चल रही थी, जिसे खारिज कराने या उसमें कानूनी राहत हासिल करने के मकसद से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
अब आगे क्या होंगे कानूनी विकल्प और राजनीतिक गलियारों में हलचल?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार किए जाने के बाद अब महुआ मोइत्रा के पास संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) में अपील दाखिल करने या प्रक्रिया के तहत निचली अदालत से ही राहत मांगने का विकल्प बचा है। देश की राजनीति और कानूनी गलियारों में इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। जानकारों का कहना है कि नफरती भाषणों से जुड़े मामलों में हाल के समय में अदालतों का रुख काफी सख्त देखने को मिला है, ऐसे में महुआ मोइत्रा को अब नियमित कानूनी प्रक्रिया का सामना करते हुए ही अपना पक्ष मजबूत करना होगा।
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