महाराष्ट्र की सियासत में फिर बड़ा खेला! एकनाथ शिंदे के 16 विधायक और 7 सांसद छोड़ेंगे साथ? उद्धव ठाकरे का बड़ा इशारा

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस समय की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने महायुति सरकार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नींद उड़ा दी है। सूबे की राजनीति में एक बार फिर साल 2022 जैसा बड़ा उलटफेर या ‘खेला’ होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर चल रही हलचलों और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक ताजा बयान ने इन अटकलों को हवा दे दी है। राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के कई कद्दावर नेता और जनप्रतिनिधि पाला बदलने की तैयारी में हैं। उद्धव ठाकरे से जब इस बारे में सीधे सवाल किया गया तो उन्होंने रहस्यमयी मुस्कान के साथ सिर्फ इतना कहा, ‘थोड़ा इंतजार कीजिए, आगे-आगे देखिए क्या होता है।’

शिंदे कैंप में असंतोष और बगावत की क्या है असली वजह

मुंबई से लेकर दिल्ली तक फैली इस सियासी चर्चा के पीछे शिंदे गुट के भीतर पनप रहा गहरा असंतोष माना जा रहा है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, एकनाथ शिंदे गुट के कम से कम 16 विधायक और 7 लोकसभा सांसद इस समय अपनी ही पार्टी के नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। इस नाराजगी की मुख्य वजह आगामी चुनावों में टिकट कटने का डर, कैबिनेट विस्तार में जगह न मिलना और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान बताई जा रही है। इन नेताओं को लग रहा है कि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच उनका राजनीतिक भविष्य खतरे में है, इसलिए वे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में उद्धव ठाकरे गुट के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार गुप्त बैठकें कर रहे हैं।

उद्धव ठाकरे के ‘मातोश्री’ में लगी नेताओं की कतार

शिवसेना (UBT) के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि नाराज चल रहे ये सभी 16 विधायक और 7 सांसद मुंबई स्थित उद्धव ठाकरे के आवास ‘मातोश्री’ के संपर्क में हैं। पिछले कुछ दिनों में उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं, विशेषकर संजय राउत के बयानों को देखें तो वे लगातार इस बात का दावा कर रहे हैं कि शिंदे गुट के कई लोग घर वापसी के लिए बेताब हैं। उद्धव ठाकरे इस समय बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। वे केवल उन्हीं नेताओं को वापस लेने के पक्ष में हैं जिनकी अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है और जिन्होंने बगावत के समय उद्धव परिवार पर तीखे व्यक्तिगत हमले नहीं किए थे। ‘थोड़ा इंतजार कीजिए’ वाले बयान से उद्धव ने यह साफ कर दिया है कि पटकथा लिखी जा चुकी है और सिर्फ सही समय का इंतजार है।

लोकल और जियोग्राफिकल समीकरणों पर क्या पड़ेगा इसका असर

यदि यह बगावत जमीन पर सच साबित होती है, तो इसका सबसे बड़ा असर कोंकण, ठाणे, मुंबई और पश्चिमी महाराष्ट्र के जियोग्राफिकल बेल्ट में देखने को मिलेगा। ये वो इलाके हैं जिन्हें शिवसेना का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। ठाणे और कोंकण में एकनाथ शिंदे की व्यक्तिगत पकड़ बेहद मजबूत रही है, लेकिन अगर उनके अपने ही गढ़ के विधायक और सांसद टूटते हैं, तो यह उनके नेतृत्व के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। वहीं दूसरी ओर, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के क्षेत्रों में भी राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि वे किस गुट के साथ खड़े रहें, जिससे जमीनी राजनीति में भारी उथल-पुथल मचना तय है।

महायुति सरकार की स्थिरता और बीजेपी की रणनीतिक चिंता

इस संभावित बगावत की खबरों ने केवल एकनाथ शिंदे ही नहीं, बल्कि उनकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। महाराष्ट्र में सरकार की स्थिरता के लिए हर एक विधायक का अंकगणित बेहद महत्वपूर्ण है। अगर इतनी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि दगा देते हैं या पाला बदलते हैं, तो न केवल सरकार संकट में आ सकती है, बल्कि आने वाले दिनों में महायुति का पूरा चुनावी गणित बिगड़ सकता है। बीजेपी आलाकमान स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और डैमेज कंट्रोल के लिए एकनाथ शिंदे के साथ आपातकालीन दौर की बातचीत शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की संभावित टूट को समय रहते रोका जा सके।