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मनीषा कोइराला ने सुनाई 14 साल पुरानी दिल दहला देने वाली दास्तान, कैंसर से जंग ने बदल दी जिंदगी

बॉलीवुड की मशहूर और अपने दौर की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार रहीं मनीषा कोइराला ने अपनी जिंदगी के उस सबसे काले और डरावने दौर को एक बार फिर याद किया है, जिसने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। कैंसर जैसी भयानक और जानलेवा बीमारी के चंगुल से सकुशल बाहर निकलकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करने वाली मनीषा कोइराला ने उस भयानक रात का जिक्र किया है जब उन्हें यह अहसास हुआ था कि अब उनका जीवन समाप्त होने वाला है। सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में उनकी यह कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने अपनी इस लंबी और दर्दनाक बीमारी के दौरान झेले गए मानसिक व शारीरिक संघर्षों के बारे में खुलकर बात की है। कैंसर सर्वाइवर के रूप में आज दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकीं मनीषा का यह इंटरव्यू हर किसी की आंखें नम कर देने के लिए काफी है, जो यह सिखाता है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर कैसे डटकर मुकाबला किया जा सकता है।

साल 2012 के आसपास का वह दौर बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला के जीवन में एक ऐसा तूफान लेकर आया था जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। अपनी फिल्मों और बेहतरीन अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली मनीषा को जब अचानक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं महसूस होने लगीं, तो उन्हें शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके शरीर के भीतर क्या चल रहा है। जब उन्होंने नेपाल से मुंबई लौटकर अपने रूटीन हेल्थ चेकअप और मेडिकल टेस्ट करवाए, तो डॉक्टरों ने उन्हें ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) जैसी अत्यंत गंभीर और जानलेवा बीमारी से ग्रस्त होने की बात बताई। इस खबर ने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी क्योंकि उस समय तक उन्हें यह लगता था कि वे पूरी तरह से स्वस्थ और ऊर्जा से भरी हुई हैं। अचानक मिली इस दिल दहला देने वाली खबर ने उनके पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया और यहीं से उनके जीवन की सबसे बड़ी और कठिन लड़ाई की शुरुआत हुई।

अपने एक हालिया इंटरव्यू में अपने उस दौर को याद करते हुए मनीषा कोइराला ने बताया कि कैंसर के इलाज के लिए जब उन्हें न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। उन्होंने उस खौफनाक रात का जिक्र करते हुए कहा कि अस्पताल के बिस्तर पर लेते हुए जब शरीर में असहनीय दर्द हो रहा था और दवाइयां भी काम करना बंद कर चुकी थीं, तो उन्हें अंदर से यह पक्का यकीन हो गया था कि अब वे इस दुनिया में और ज्यादा देर तक नहीं टिक पाएंगी। उस रात अकेलेपन और मौत के करीब होने के अहसास ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था, और उन्हें लगा कि उनका सफर यहीं खत्म हो रहा है। हालांकि उस अंधेरे और निराशा के समंदर के बीच भी उनके भीतर जीने की एक ऐसी चिंगारी सुलग रही थी जिसने उन्हें हार नहीं मानने दी, और डॉक्टरों की कड़ी मेहनत तथा उनके परिवार के अटूट समर्थन ने उन्हें मौत के मुंह से खींचकर वापस बाहर निकाल लिया।

कैंसर जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी को मात देकर जब मनीषा कोइराला ने लगभग दो साल के लंबे और दर्दनाक इलाज के बाद भारत वापसी की, तो वे एक बिल्कुल नई इंसान बन चुकी थीं। बीमारी के उस काले साये ने उनके अंदर भौतिक सुख-सुविधाओं और फिल्मी चकाचौंध के प्रति मोह को पूरी तरह से खत्म कर दिया, और उन्हें यह सिखाया कि सांस लेना और अपनों के साथ वक्त बिताना ही दुनिया की सबसे बड़ी नेमत है। उन्होंने अपनी इस पूरी जीवन यात्रा को एक किताब ‘हील्ड: हाउ कैंसर गव मी ए न्यू लाइफ’ (Healed: How Cancer Gave Me a New Life) के रूप में भी दर्ज किया है, ताकि वे दुनिया भर के उन तमाम लोगों की हिम्मत बन सकें जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं। आज मनीषा कोइराला कैंसर जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती हैं और लोगों को यह संदेश देती हैं कि सही समय पर जांच और सकारात्मक मानसिक सोच के जरिए इस बीमारी को हराया जा सकता है।