भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में 37% की भारी गिरावट! जानिए महिलाओं में कम होते इस जानलेवा कैंसर के पीछे की असली वजह, लक्षण और बचाव के उपाय!

महिलाओं के स्वास्थ्य और कैंसर जागरूकता के मोर्चे पर भारत से एक बेहद उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। स्वास्थ्य क्षेत्र की हालिया रिपोर्टों और अध्ययनों के अनुसार, भारत में महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 37 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कभी भारतीय महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला यह कैंसर अब जागरूकता, सरकारी अभियानों और समय पर सही डॉक्टरी जांच की बदौलत धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑनकोलॉजिस्ट्स (कैंसर विशेषज्ञों) ने इस गिरावट को भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की एक बहुत बड़ी कामयाबी बताया है।

मामलों में गिरावट के 3 मुख्य कारण: HPV वैक्सीन, स्क्रीनिंग और बेहतर स्वच्छता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के नए मामलों में इतनी बड़ी गिरावट आने के पीछे 3 प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं:

  • एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन: सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का संक्रमण होता है। पिछले कुछ सालों में एचपीवी वैक्सीन के प्रति महिलाओं और किशोरियों में जागरूकता काफी बढ़ी है। सही उम्र में टीका लगने से वायरस का संक्रमण रुक रहा है।

  • पैप स्मियर (Pap Smear) और नियमित स्क्रीनिंग: महिलाओं में नियमित हेल्थ चेकअप और पैप स्मियर टेस्ट कराने का चलन बढ़ा है। इस टेस्ट की मदद से कैंसर बनने से पहले ही प्री-कैंसरस सेल्स (Pre-cancerous cells) की पहचान कर ली जाती है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो पा रहा है।

  • मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और जागरूकता: ग्रामीण व शहरी इलाकों में सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल, बेहतर व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) और सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य अभियानों ने इस बीमारी के जोखिम को काफी कम किया है।

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण: जिन्हें कभी न करें नजरअंदाज

हालांकि मामलों में गिरावट आई है, लेकिन फिर भी इस बीमारी के प्रति सतर्क रहना हर महिला के लिए आवश्यक है। सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों में:

  • पीरियड्स के अलावा या संभोग (Intercourse) के बाद असामान्य ब्लीडिंग होना।

  • मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद भी ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना।

  • वजाइना से बदबूदार या असामान्य डिस्चार्ज (वाइट पानी) आना।

  • पेल्विक एरिया (पेट के निचले हिस्से) या कमर में लगातार दर्द बने रहना।

    यदि किसी महिला को ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें बिना किसी शर्म या झिझक के तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए।

30 वर्ष की उम्र के बाद कराएं नियमित जांच, 9 से 14 वर्ष की बालिकाओं के लिए वैक्सीन अनिवार्य

हेल्थ एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि 9 से 14 वर्ष की आयु की सभी बालिकाओं को एचपीवी की वैक्सीन जरूर लगवा देनी चाहिए, क्योंकि यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे अचूक हथियार है। इसके अलावा, 30 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला को हर 3 से 5 साल में कम से कम एक बार पैप स्मियर या एचपीवी डीएनए टेस्ट जरूर कराना चाहिए। समय पर की गई जांच और टीकाकरण ही भारत से सर्वाइकल कैंसर को पूरी तरह जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।