
देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है, जिससे भारतीय छात्रों को अब विदेशी धरती पर जाकर पढ़ाई करने का महंगा खर्च उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूजीसी (UGC) और केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत देश में दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की राह तेजी से आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत देश में जल्द ही 15 टॉप विदेशी यूनिवर्सिटीज के कैंपस स्थापित किए जाने की तैयारी है, जहां छात्र भारत में रहकर ही ग्लोबल स्टैंडर्ड की विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
कौन-से आधुनिक कोर्सेज और विषय होंगे शामिल
इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारतीय परिसरों में उन तमाम आधुनिक और भविष्य की जरूरतों वाले विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा जिनकी डिमांड ग्लोबल मार्केट में सबसे ज्यादा है। इनमें मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे कटिंग-एज कोर्सेज शामिल होंगे। इसके अलावा बिजनेस मैनेजमेंट, नैनो टेक्नोलॉजी और स्टेम (STEM) एजुकेशन के विभिन्न क्षेत्रों में भी छात्रों को उच्च कोटि की शिक्षा और रिसर्च के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।
छात्रों और देश की अर्थव्यवस्था को मिलेंगे बड़े फायदे
भारत में विदेशी यूनिवर्सिटीज के कैंपस खुलने से देश के लाखों मेधावी छात्रों का पैसा और समय दोनों बचेगा, जो विदेश जाने के दौरान वीजा, ट्रैवल और महंगे लिविंग कॉस्ट पर खर्च होता था। इसके साथ ही भारतीय शिक्षा प्रणाली में ग्लोबल कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जिससे यहां के स्थानीय विश्वविद्यालयों को भी अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे को और बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत को ‘ग्लोबल एजुकेशन हब’ बनाने की दिशा में इस कदम को एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रवेश प्रक्रिया और गुणवत्ता से जुड़ी खास बातें
इन विदेशी परिसरों में एडमिशन पाने वाले छात्रों को बिल्कुल वही डिग्री और सर्टिफिकेट मिलेंगे जो उन यूनिवर्सिटीज के मुख्य विदेशी कैंपस में दिए जाते हैं। यूजीसी के कड़े नियमों के तहत इन संस्थानों को भारत में अकादमिक और प्रशासनिक स्तर पर पूरी पारदर्शिता रखनी होगी, साथ ही फीस स्ट्रक्चर को भी भारतीय छात्रों की पहुंच के भीतर रखने के प्रावधान किए गए हैं। देश के बड़े महानगरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में इन परिसरों की स्थापना के लिए कई प्रतिष्ठित वैश्विक शिक्षण संस्थानों ने अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
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