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भारतीय सेना की ताकत में ऐतिहासिक इजाफा, 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मिली हरी झंडी

राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के लिए लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम रक्षा खरीद प्रस्तावों को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस बड़े रक्षा सौदे का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं की मारक क्षमता, सामरिक दक्षता और तकनीकी सुदृढ़ता को आधुनिक युद्धक जरूरतों के अनुसार और अधिक मजबूत करना है ताकि देश की सीमाओं की सुरक्षा को पूरी तरह से अचूक बनाया जा सके। वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार का यह निर्णय भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण रक्षा अधिग्रहणों में से एक माना जा रहा है, जिससे देश की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी।

#रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में मेगा डिफेंस डील को मंजूरी

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की इस अहम बैठक में देश की तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए कई दूरगामी प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श किया गया जिसके बाद ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ यानी एओएन प्रदान की गई। रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस संपूर्ण 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा अधिग्रहण पैकेज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सर्वोपरि रखा गया है। स्वीकृत किए गए कुल रक्षा उपकरणों और सैन्य साजो-सामान में से लगभग 98 प्रतिशत की खरीद सीधे तौर पर घरेलू भारतीय रक्षा उद्योग से ही की जाएगी। इससे न केवल विदेशी रक्षा साजो-सामान पर भारत की निर्भरता में भारी कमी आएगी बल्कि देश के भीतर ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब को मजबूत होने का सुनहरा अवसर भी मिलेगा। सरकार के इस कदम से भारतीय रक्षा क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक उद्योगों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन मिलेगा जिससे भविष्य में अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों का निर्माण स्वदेशी स्तर पर तेजी से किया जा सकेगा।

#सेना को मिलेंगे सीबीआरएन रेकी वाहन और आधुनिक हाई मोबिलिटी व्हीकल्स

भारतीय थल सेना की जमीनी और सामरिक क्षमताओं को বহুগुणा बढ़ाने के लिए इस मेगा रक्षा सौदे में कई अत्याधुनिक वाहनों और उपकरणों को शामिल किया गया है। थल सेना के लिए विशेष तौर पर केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) रेकी वाहनों की खरीद को मंजूरी दी गई है जो किसी भी संभावित रासायनिक, जैविक या परमाणु रूप से दूषित क्षेत्र का सटीक पता लगाने, उसकी तुरंत पहचान करने, लगातार निगरानी रखने और सैनिकों को सुरक्षित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा कठिन पर्वतीय और रेगिस्तानी इलाकों में सैनिकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए अत्याधुनिक हाई मोबिलिटी वाहनों के अधिग्रहण का रास्ता भी साफ हो गया है जो चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में सेना की लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और ऑपरेशनल गतिशीलता को अत्यधिक तीव्र करेंगे। इन आधुनिक वाहनों के बेड़े में शामिल होने से सेना किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में दुश्मन के खिलाफ और अधिक तेजी से और आक्रामक रूप से अपने सामरिक अभियानों को अंजाम देने में पूरी तरह से सक्षम हो जाएगी।

#मैकेनिकल माइन लेयर्स और ब्रिज सिस्टम से सुदृढ़ होगी युद्धक क्षमता

युद्ध के मैदान में पलक झपकते ही रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुछ अत्यंत विशिष्ट और मारक प्रणालियों को खरीदने का निर्णय लिया है। इस पैकेज के तहत सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स की खरीद की जाएगी जो दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी अत्यंत तेजी से और तुरंत बारूदी सुरंग बिछाने यानी माइन-लेइंग के कार्य को पूरा करने की ऑपरेशनल क्षमता प्रदान करेंगे जिससे दुश्मन के टैंकों और वाहनों के आगे बढ़ने के रास्ते को तुरंत रोका जा सके। इसके साथ ही युद्ध के दौरान विभिन्न नदियों, खड्डों या कठिन भू-भागों को पार करने के लिए ट्रॉवल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है। इन अत्याधुनिक ब्रिज प्रणालियों का मुख्य उपयोग युद्ध क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने वाले हमारे लड़ाकू दस्तों और टैंक रेजीमेंट्स को निर्बाध और कंपोजिट क्रॉसिंग सुविधा प्रदान करना है ताकि भारतीय सेना का विजय रथ किसी भी प्राकृतिक बाधा के कारण रुके नहीं और आक्रामक सामरिक अभियान बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रह सकें।

#एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर से वायु और थल सेना दोनों को मिलेगी अभूतपूर्व शक्ति

इस संपूर्ण रक्षा सौदे का एक अन्य सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आकर्षण एडवांस्ड लाइट हेलीकाप्टर (एएलएच) की बड़े पैमाने पर खरीद है जिसे भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना दोनों के लिए शामिल किया जा रहा है। इन स्वदेशी और अत्याधुनिक रूप से उन्नत हेलीकॉप्टरों के बेड़े में शामिल होने से दोनों ही सेनाओं की सभी प्रकार के भौगोलिक इलाकों और विषम ऑपरेशनल स्थितियों में जटिल से जटिल मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने की कार्यक्षमता में भारी इजाफा होगा। इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग सैनिकों की त्वरित आवाजाही, दुर्गम क्षेत्रों में रसद आपूर्ति, घायलों को तुरंत सुरक्षित निकालने (इवेक्यूएशन) और हवाई सामरिक सहायता प्रदान करने के लिए बेहद प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हेलीकॉप्टरों के जुड़ने से भारत की सामरिक स्ट्राइक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और सीमाओं पर किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमारी सेनाएं पूरी तरह से हर वक्त तैयार रहेंगी।

#आत्मनिर्भर भारत और घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा ऐतिहासिक संबल

रक्षा मंत्रालय के इस दूरदर्शी फैसले से देश के भीतर रक्षा उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को एक नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी। जब 98 प्रतिशत रक्षा उपकरणों का निर्माण और खरीद स्वदेशी भारतीय रक्षा उद्योगों से की जाएगी, तो देश के भीतर रोजगार के लाखों नए अवसरों का सृजन होगा और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति होगी। सरकार का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक देश बनकर नहीं रहना चाहता बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़े रक्षा निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश के रक्षा निर्यात में लगातार रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई है और इस प्रकार के बड़े घरेलू रक्षा अनुबंधों से भारतीय उद्योगों को अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का बेहतरीन मंच प्राप्त होगा।

#सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर में भारत की सामरिक तैयारियों का नया मील का पत्थर

देश के प्रमुख रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों ने सरकार के इस 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को भारत की बदलती हुई सैन्य नीति और आधुनिक युद्धक तैयारियों का एक नया मील का पत्थर करार दिया है। आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, रडार सिस्टम, उन्नत मोबिलिटी, सटीक मारक क्षमता और त्वरित संचार प्रणालियों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। डीएसी द्वारा स्वीकृत किए गए ये तमाम नए उपकरण और वाहन भविष्य की हर एक संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए भारतीय सेनाओं को पूरी तरह से तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और अत्याधुनिक बना देंगे। देश की तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और उन्हें किसी भी मोर्चे पर दुश्मन पर पूर्ण सामरिक बढ़त दिलाने के लिहाज से यह रक्षा सौदा मील का पत्थर साबित होगा।