
बिहार में सरकारी सेवा के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी BDO ने महज 12 साल की छोटी सी सेवा अवधि में ही उम्मीदों और कानून के दायरे से कोसों दूर जाकर बेशकीमती साम्राज्य खड़ा कर लिया है। जब आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की विशेष टीम ने करप्शन के इस मामले में इन अधिकारी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, तो सामने आए दस्तावेज और चल-अचल संपत्ति के आंकड़े देखकर खुद जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। एक तरफ जहां राज्य सरकार और आम जनता पारदर्शी प्रशासन और सुशासन की उम्मीद लगाए बैठी है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमे में बैठे कुछ नुमाइंदे अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर कैसे जनता के पैसों पर डाका डालते हैं, यह मामला उसकी एक बानगी भर है। इस सनसनीखेज कार्रवाई ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सिस्टम के भीतर बैठे इन भ्रष्ट चेहरों को इतना संरक्षण कैसे मिल जाता है और वे इतने कम समय में अकूत संपत्ति के मालिक कैसे बन बैठते हैं।
12 साल का सफर और करोड़ों का साम्राज्य: कैसे हुआ काले कारनामों का खुलासा?
सरकारी नौकरी में आने के बाद से ही तरक्की और धन-दौलत कमाने की रफ्तार इतनी तेज हो सकती है, आम आदमी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता है। जिस BDO की यह पूरी कहानी है, उन्होंने सेवा में आने के बाद से ही अपनी कार्यशैली और कथित तौर पर भ्रष्टाचार के जरिए अवैध कमाई के कई रास्ते तलाश लिए थे। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को पिछले काफी समय से इस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की गुप्त शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद पुख्ता सबूत इकट्ठा कर अदालत से सर्च वारंट हासिल किया गया। जब विजिलेंस और EOU की संयुक्त टीमों ने पटना समेत कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, तो कागजों पर दर्ज सैलरी और असलियत में मौजूद संपत्तियों के बीच का अंतर देखकर हर कोई दंग रह गया। शुरुआती जांच में ही ऐसे कई दस्तावेज हाथ लगे हैं जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि सेवाकाल के इन 12 वर्षों में वेतन के मुकाबले कई गुना ज्यादा संपत्ति जुटाई गई, जिसमें महंगे प्लॉट, आलीशान फ्लैट और भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात शामिल हैं।
EOU की रेड में मिले अकूत बेनामी ठिकाने और विलासिता के साधन
छापेमारी के दौरान आर्थिक अपराध इकाई के हाथ जो दस्तावेज लगे हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। BDO साहब के नाम पर राजधानी पटना और उनके पैतृक जिलों में एक से बढ़कर एक आलीशान मकान, व्यावसायिक इमारतें और प्राइम लोकेशन पर कीमती जमीनों के कागजात बरामद हुए हैं। इसके अलावा, उनके कई रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर भी संपत्तियों में भारी निवेश किए जाने के पुख्ता सुराग मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए सुनियोजित तरीके से बेनामी संपत्तियां बनाई गई थीं। घर की तलाशी के दौरान बैंक खातों में भारी रकम, एलआईसी पॉलिसी, शेयर बाजार में निवेश और लॉकरों से करोड़ों रुपये के जेवरात भी मिले हैं। एक सरकारी सेवक के घर इस तरह की विलासिता और अकूत संपत्ति को देखकर वहां मौजूद स्थानीय लोग भी हैरान थे, क्योंकि जो अधिकारी आम जनता के कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए तैनात किया गया था, वह खुद अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त था।
बिहार में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मामले और प्रशासनिक चिंताएं
बिहार में आय से अधिक संपत्ति का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में विजिलेंस और EOU की कार्रवाई में कई इंजीनियर, राजस्व कर्मचारी, थानेदार और प्रखंड स्तर के अधिकारी करोड़ों की संपत्ति के साथ पकड़े जा चुके हैं। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें प्रशासनिक ढांचे के भीतर कितनी गहरी हो चुकी हैं। जब निचली और मध्य स्तर की प्रशासनिक इकाइयों में इस तरह की अंधेरगर्दी मचती है, तो सबसे ज्यादा पिसता आम नागरिक है जिसे छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और रिश्वत देनी पड़ती है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल सरकार की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि उन ईमानदार अधिकारियों के मनोबल को भी तोड़ती हैं जो पूरी निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हैं। जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ट्रांसफर-पोस्टिंग और मलाईदार पदों पर तैनाती का यह खेल कब तक चलेगा और क्या केवल छापेमार कार्रवाई से इस दीमक को रोका जा सकता है।
कड़ी कार्रवाई की मांग और भविष्य की कानूनी चुनौतियां
छापेमारी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब आरोपी BDO पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। EOU की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों और संपत्तियों का पूरा मूल्यांकन कर रही है, जिसके आधार पर आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का एक पुख्ता मामला दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री होने की भी पूरी संभावना जताई जा रही है ताकि अवैध तरीके से अर्जित किए गए इस पूरे साम्राज्य को जब्त किया जा सके। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही इस मुहिम में यह मामला एक बार फिर से एक बड़ा नजीर बनने जा रहा है, बशर्ते इस जांच को उसके तार्किक और सजा वाले मुकाम तक पहुंचाया जाए। जनता और मीडिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार और जांच एजेंसियां कितनी सख्ती से पेश आती हैं और क्या ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को उनकी करनी की पूरी सजा मिल पाती है या फिर मामला कागजी बहसों में ही सिमट कर रह जाता है।
girls globe