
देश की शीर्ष कानूनी संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उनके लंबे कार्यकाल और पद पर बने रहने को चुनौती दी गई है। इस बीच, मनन मिश्रा ने तमाम विरोध प्रदर्शनों और इस्तीफे की मांग के बीच दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।
क्या है पूरा विवाद और सुप्रीम कोर्ट में याचिका?
यह पूरा विवाद हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के बाद मचे बवाल से शुरू हुआ था। इस मामले में BCI अध्यक्ष ने पहले छात्रों का एनरोलमेंट रद्द करने का आदेश दिया था, जिसे 15 मिनट के भीतर ही वापस ले लिया गया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में वकील दीपक प्रकाश के माध्यम से एक याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मनन मिश्रा का एक दशक से अधिक समय तक लगातार बीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहना नियमों के खिलाफ है। याचिका में BCI नियमों के नियम 12(2) का हवाला देते हुए 21 अप्रैल 2025 के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था।
‘मैं चुनाव से आया हूं, देश के 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करता हूं’
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने और दिल्ली में वकीलों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद मनन मिश्रा ने मीडिया के सामने खुलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे किसी मनोनीत पद पर नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव के जरिए इस पद पहुंचे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि BCI देश के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक कानूनी संस्था है। उनके अनुसार, यह उनका सातवां कार्यकाल है और पिछले छह बार वे निर्विरोध चुने गए हैं। आज भी बार काउंसिल के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य उनके साथ हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी वित्तीय और पारिवारिक नियुक्तियों के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया और कहा कि वे तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक देश के वकील यानी मतदाता ऐसा चाहेंगे।
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