
पटना की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हो चुका है, लेकिन नतीजों से पहले ही बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। हाल ही में आरजेडी (RJD) का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए तेज-तर्रार नेता मृत्युंजय तिवारी ने चुनावी नतीजों को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा ठोक दिया है। मृत्युंजय तिवारी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा है कि 3 अगस्त को जब मतपेटी खुलेगी, तो बांकीपुर में विरोधियों का नामोनिशान मिट जाएगा और उनकी जमानत तक जब्त हो जाएगी।
3 अगस्त के नतीजों पर मृत्युंजय तिवारी का सबसे बड़ा दावा
बीजेपी के पाले में आते ही मृत्युंजय तिवारी लगातार विपक्ष और क्षेत्रीय दलों पर हमलावर हैं। बांकीपुर सीट पर हुए मतदान के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार जनता ने विकास और राष्ट्रवाद के नाम पर एकतरफा वोट किया है। 3 अगस्त को आने वाले नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी दल चाहे जितने भी दावे कर लें, लेकिन बांकीपुर की समझदार जनता ने विपक्ष के खोखले वादों को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने दावा किया कि मतों की गिनती के दिन वोटों का ऐसा सैलाब दिखेगा कि विरोधी खेमे में सन्नाटा पसर जाएगा।
आरजेडी छोड़ने के बाद बीजेपी के पक्ष में बनाई मजबूत जमीन
गौर करने वाली बात यह है कि बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले मृत्युंजय तिवारी का आरजेडी से इस्तीफा देना और बीजेपी ज्वाइन करना बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा है। सालों तक लालू प्रसाद यादव की पार्टी का मजबूत चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी के इस कदम ने आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की है। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने बांकीपुर में एनडीए (NDA) उम्मीदवार के पक्ष में जमकर पसीना बहाया है, और यही वजह है कि वह नतीजों को लेकर इतने आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
प्रशांत किशोर और विपक्षी धड़े पर जमकर साधा निशाना
चर्चा यह भी है कि बांकीपुर में ‘जन सुराज’ के अभियान और अन्य विपक्षी दलों की सक्रियता से मुकाबला त्रिकोणीय दिख रहा था, लेकिन मृत्युंजय तिवारी ने इन सभी कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बिना नाम लिए प्रशांत किशोर (PK) की रणनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि सोशल मीडिया की हवा और जमीन की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर होता है। उनके मुताबिक, विपक्ष ने चुनाव जीतने के लिए अनैतिक तरीके अपनाने की भी कोशिश की, लेकिन बांकीपुर का गढ़ हमेशा की तरह इस बार भी अभेद्य रहेगा। अब सबकी निगाहें 3 अगस्त की सुबह पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि मृत्युंजय तिवारी का यह दावा कितना सच साबित होता है।
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