बस हादसों में पीड़ितों के लिए ‘जीवनदायिनी’ बनी यात्री राहत योजना, 9 साल में योगी सरकार ने बांटे 17.33 करोड़ रुपये

उत्तर प्रदेश में बस दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले लोगों और उनके परिवारों के लिए योगी सरकार की ‘यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना’ आर्थिक सहारा बनकर सामने आई है। सरकार के मुताबिक, पिछले नौ वर्षों में इस योजना के तहत बस हादसों से प्रभावित लोगों को 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। योजना का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों और उनके परिजनों को तत्काल आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है।

नौ साल में 17.33 करोड़ से ज्यादा की मदद

उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत सड़क और बस दुर्घटनाओं में प्रभावित यात्रियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। बीते नौ वर्षों के दौरान सरकार ने इसके लिए 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है। इससे दुर्घटना के बाद अचानक आने वाले आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को राहत मिली है।

अब बस में सवार नहीं होने वाले पीड़ित भी दायरे में

यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना की खास बात यह है कि समय के साथ इसका दायरा बढ़ाया गया है। अब इसका लाभ केवल बस में सफर कर रहे यात्रियों तक सीमित नहीं है। बस दुर्घटना से प्रभावित ऐसे लोग, जो हादसे के समय बस में सवार नहीं थे, उन्हें भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इससे दुर्घटनाओं में प्रभावित लोगों को सहायता मिलने का दायरा और व्यापक हुआ है।

हादसे के बाद आर्थिक संकट में सहारा

बस दुर्घटना में घायल होने या जान गंवाने की स्थिति में पीड़ित परिवारों के सामने इलाज, रोजमर्रा के खर्च और अन्य आर्थिक जरूरतों की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे समय में सरकारी आर्थिक सहायता परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत साबित होती है। इसी वजह से यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना को दुर्घटना पीड़ितों के लिए अहम कल्याणकारी पहल माना जा रहा है।

सरकार ने बढ़ाया योजना का दायरा

उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को सहायता देने के लिए संचालित इस योजना में समय के साथ बदलाव किए गए हैं। योजना को व्यापक बनाते हुए बस दुर्घटनाओं से प्रभावित अधिक लोगों को इसके तहत सहायता देने की व्यवस्था की गई है। इससे सरकार की दुर्घटना पीड़ितों तक राहत पहुंचाने की नीति को मजबूती मिली है।