बच्चों को भी हो सकता है गठिया मत समझें इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का दर्द, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

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News India Live, Digital Desk: अक्सर हम अर्थराइटिस या गठिया को बुढ़ापे की बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चिकित्सा जगत से आई ताजा जानकारी आपको हैरान कर सकती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अब बच्चे भी ‘जुवेनाइल इडियोपैथिक अर्थराइटिस’ (Juvenile Idiopathic Arthritis – JIA) का शिकार हो रहे हैं। अगर आपका बच्चा अक्सर जोड़ों में दर्द या चलने में कठिनाई की शिकायत करता है, तो इसे सामान्य ‘ग्रोइंग पेन’ (बढ़ती उम्र का दर्द) समझने की गलती भारी पड़ सकती है। समय पर पहचान न होने पर यह बीमारी बच्चे के विकास को रोक सकती है और अंगों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।

क्या है जुवेनाइल अर्थराइटिस (JIA)?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) गलती से अपने ही जोड़ों के ऊतकों (Tissues) पर हमला करने लगता है। इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न होने लगती है। आमतौर पर यह समस्या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बच्चों में गठिया के लक्षण बड़ों की तुलना में थोड़े अलग और भ्रमित करने वाले हो सकते हैं:

जोड़ों में दर्द और सूजन: सुबह उठने पर जोड़ों में अधिक दर्द या जकड़न महसूस होना।

लंगड़ाकर चलना: बच्चा अचानक से लंगड़ाकर चलने लगे, खासकर सुबह के समय।

लगातार बुखार: बिना किसी संक्रमण के बार-बार बुखार आना और साथ में शरीर पर चकत्ते (Rashes) पड़ना।

सुस्ती और थकान: बच्चा खेल-कूद में रुचि कम लेने लगे और जल्दी थक जाए।

आंखों में परेशानी: कुछ मामलों में आंखों में लालिमा या धुंधलापन भी इसका संकेत हो सकता है।

बच्चों में गठिया के मुख्य कारण

डॉक्टरों का मानना है कि JIA का कोई एक सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ कारक इसके खतरे को बढ़ा देते हैं:

अनुवांशिकी (Genetics): परिवार में किसी को ऑटोइम्यून बीमारी होने पर जोखिम बढ़ जाता है।

पर्यावरणीय कारक: कुछ वायरस या बाहरी संक्रमण इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।

बिगड़ती जीवनशैली: शारीरिक सक्रियता की कमी और असंतुलित खान-पान भी बच्चों के इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर रहा है।

इलाज और प्रबंधन: माता-पिता क्या करें?

राहत की बात यह है कि शुरुआती दौर में पहचान होने पर दवाओं और थेरेपी के जरिए इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है:

जल्द निदान: लक्षण दिखने पर तुरंत पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट (बच्चों के गठिया विशेषज्ञ) से संपर्क करें।

फिजिकल थेरेपी: जोड़ों को लचीला बनाए रखने के लिए विशेष व्यायाम और फिजियोथेरेपी बहुत कारगर है।

पौष्टिक आहार: बच्चों को ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-D युक्त भोजन दें जो सूजन कम करने में सहायक हो।

मानसिक सहयोग: बीमारी के कारण बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है, ऐसे में उसे मानसिक रूप से सपोर्ट करें।

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