बदहाली की पटरी पर पाकिस्तान रेलवे 50% स्टाफ की कमी और खाली खजाना, क्या पूरी तरह ठप हो जाएगी लाइफलाइन?

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News India Live, Digital Desk : पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है और अब इसका सीधा असर वहां की लाइफलाइन कहे जाने वाले पाकिस्तान रेलवे पर दिखने लगा है। गंभीर वित्तीय संकट, ईंधन की कमी और कर्मचारियों के भारी टोटे के कारण पाकिस्तान रेलवे पतन की कगार पर पहुँच गया है। हालात इतने खराब हैं कि कई मुख्य रूटों पर ट्रेनों का संचालन बंद करना पड़ा है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

स्टाफ की भारी किल्लत: 50% पदों पर लटके ताले

पाकिस्तान रेलवे के लाहौर डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि अकेले लाहौर डिवीजन में स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। ड्राइवर, गार्ड और तकनीकी स्टाफ की इस कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ दोगुना हो गया है, जिससे रेल हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए रेलवे के पास फंड नहीं है।

खाली खजाना और ईंधन का संकट

पाकिस्तान रेलवे के पास न तो पुरानी पटरियों की मरम्मत के लिए पैसा है और न ही ट्रेनों के लिए पर्याप्त ईंधन खरीदने का बजट। पिछले कुछ महीनों में डीजल की कमी के कारण दर्जनों मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अगर सरकार की ओर से तत्काल वित्तीय पैकेज नहीं मिला, तो आने वाले हफ्तों में रेल सेवा पूरी तरह ठप हो सकती है।

ट्रेनों की लेटलतीफी और खराब बुनियादी ढांचा

पैसे की कमी का असर रेलवे के बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है। पाकिस्तान के मुख्य रेल मार्ग (Karachi-Peshawar) पर पटरियां इतनी खराब हो चुकी हैं कि ट्रेनों को बहुत कम गति से चलाना पड़ रहा है। इसके बावजूद पिछले कुछ समय में हादसों की संख्या में वृद्धि हुई है। मुसाफिरों की शिकायत है कि ट्रेनें 6 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं और स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है।

निजीकरण की ओर बढ़ते कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार जानबूझकर रेलवे की हालत खराब कर रही है ताकि इसे घाटे का सौदा बताकर निजी हाथों में सौंपा जा सके। हालांकि, कर्मचारी यूनियनों ने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत रेल नेटवर्क को सुधारने के वादे भी अब तक कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।

आम जनता पर दोहरी मार

महंगाई से त्रस्त पाकिस्तान की जनता के लिए रेलवे परिवहन का सबसे सस्ता साधन था। लेकिन ट्रेनों के रद्द होने और किराए में बढ़ोत्तरी के कारण आम आदमी के लिए सफर करना अब सपना बनता जा रहा है। स्टेशन पर घंटों इंतजार और अनिश्चितता ने मुसाफिरों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

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