
बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद फूड प्रोडक्ट्स पर बड़े-बड़े और लुभावने दावे करके ग्राहकों को आकर्षित करने वाली कंपनियों पर सरकारी चाबुक चल गया है। देश में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और मानकों की निगरानी करने वाली संस्था फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने भ्रामक विज्ञापनों, गलत ब्रांडिंग और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अपनी देशव्यापी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। इसी कड़ी में नियामक ने सफोला ऑयल, किंडर जॉय, बीकानेरवाला, मास्टरचाउ और रॉ प्रेसरी जैसी देश की कई दिग्गज खाद्य कंपनियों और उनके चुनिंदा प्रोडक्ट्स को कड़ा नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सफोला ऑयल के ‘हार्ट प्रो’ और दिल की सेहत वाले दावे पर उठे सवाल
FSSAI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, बाजार में बिक रहे कई नामी उत्पादों पर किए गए दावे सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को भ्रमित और गुमराह कर सकते हैं। इस कार्रवाई के तहत मारिको (Marico) कंपनी के बेहद लोकप्रिय कुकिंग ऑयल ‘सफोला टोटल हार्ट प्रो मल्टी सोर्स कुकिंग ऑयल’ (Saffola Total Heart Pro) पर ‘हार्ट प्रो’ जैसे हैवी शब्दों और दिल से जुड़ी तस्वीरों के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। फूड रेगुलेटर का स्पष्ट कहना है कि इस तरह की ब्रांडिंग से आम जनता के बीच यह गलत धारणा (Misconception) बन सकती है कि यह तेल दिल की बीमारियों को पूरी तरह ठीक या जादुई रूप से लाभकारी रखने के लिए कोई विशेष दवा या प्राधिकृत उत्पाद है।
जांच के दायरे में आए ये 7 लोकप्रिय प्रोडक्ट्स और ब्रांड्स
FSSAI की पैनी नजर केवल कुकिंग ऑयल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसने अलग-अलग कैटेगरी के कई अन्य मशहूर ब्रांड्स को भी अपनी रडार पर लिया है, जिनकी सूची इस प्रकार है:
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AS-IT-IS Atom PWR Whey XL: हेल्थ सप्लीमेंट और प्रोटीन पाउडर के दावों की जांच।
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सिल्कन टोफू (Silken Tofu): ब्रांडिंग और पैकेजिंग मानकों का उल्लंघन।
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मास्टरचाउ नूडल्स (MasterChow Noodles): प्रिजर्वेटिव्स और विज्ञापनों पर स्पष्टीकरण।
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किंडर जॉय (Kinder Joy): कोटेड वेफर बिस्कुट पर किए गए दावों की सत्यता की जांच।
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प्लक्क मैंगो फ्रूट जूस (Pluckk): फलों के रस की वास्तविक मात्रा और पैकेजिंग दावे।
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रॉ प्रेसरी (Raw Pressery) व नेचुरल पनीर: शुद्धता और प्राकृतिक होने के दावों पर सवाल।
‘100% नेचुरल’ और ‘No Added Sugar’ के दावों पर मांगा सबूत
अक्सर कंपनियां अपने फायदे के लिए पैकेट पर बड़े अक्षरों में ‘100% Natural’, ‘100% Veg’, ‘No Added Sugar’ (बिना अतिरिक्त चीनी के) और ‘Rich in Milk Solids’ (दूध के तत्वों से भरपूर) लिख देती हैं। FSSAI ने अब इन दावों की वैज्ञानिक सत्यता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनियों से इसके पुख्ता सबूत और स्पष्टीकरण मांगे हैं। नियामक ने यह भी पाया कि कुछ कंपनियां अपने सामान्य खाद्य उत्पादों को इस तरह विज्ञापित कर रही हैं जैसे वे कोई चिकित्सीय लाभ (Medical Benefits) देती हों या किसी खास बीमारी को जड़ से खत्म कर सकती हों, जो कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पूरी तरह गैर-कानूनी है।
बीकानेरवाला की रसोई और परम डेयरी के दही में फंगस पर एक्शन
मशहूर फूड चेन बीकानेरवाला (Bikanervala) भी इस कार्रवाई की जद में आया है। एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद, जिसमें रसोई क्षेत्र (Kitchen Area) में कर्मचारियों द्वारा ही भोजन करने और हाइजीन के नियमों की अनदेखी करने की बात सामने आई थी, बीकानेरवाला को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इसके अलावा, ग्राहकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के मामले में परम डेयरी (Param Dairy) को भी नोटिस भेजा गया है। परम डेयरी के दही और रबड़ी में फंगस (उल्ली) पाए जाने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। FSSAI ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि देश में बिकने वाले सभी खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विज्ञापन पूरी तरह से सरकारी नियमों के अनुरूप पारदर्शी होने चाहिए, ताकि ग्राहकों को सही जानकारी मिल सके। नियमों का उल्लंघन करने वाले ब्रांड्स के खिलाफ भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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