
भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली और जंक फूड आधारित खान-पान के चलते आज के समय में हमारे पेट से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याएं आम बात बन चुकी हैं। कभी कभार ज्यादा खाना खा लेने या अनियमित दिनचर्या के कारण गैस, एसिडिटी, कब्ज या अपच होना एक सामान्य प्रक्रिया लग सकती है। हालांकि, यदि यही अपच, पेट में भारीपन, गैस और बदहजमी की शिकायत आपकी रोजमर्रा की आदत बन जाए और इसके साथ ही आपकी भूख अचानक गायब होने लगे तथा बिना किसी डाइटिंग या जिम के आपका तेजी से वजन घटने लगे, तो यह किसी साधारण मौसमी गड़बड़ी का संकेत नहीं है। देश और दुनिया के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और कैंसर विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह शरीर के भीतर पनप रहे खतरनाक पेट के कैंसर (Stomach Cancer / Gastric Cancer) के शुरुआती और बेहद गंभीर चेतावनी भरे संकेत हो सकते हैं। अज्ञानता या लापरवाही के चलते लोग अक्सर इन लक्षणों को साधारण गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं पेट के कैंसर के उन प्रमुख लक्षणों के बारे में जिन्हें समय रहते पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
पेट का कैंसर एक ऐसी गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें पेट की आंतरिक परतों (Mucosa) में असामान्य और अनियंत्रित कोशिकाओं की वृद्धि होने लगती है। प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण इतने सामान्य और सूक्ष्म होते हैं कि मरीज अक्सर उन्हें एसिडिटी या गैस्ट्राइटिस समझकर एंटासिड गोलियां खाकर टाल देता है। यदि आपको भी पिछले कुछ हफ्तों से लगातार खाना खाने के तुरंत बाद पेट में ऊपरी हिस्से में तेज जलन, भारीपन, खट्टी डकारें आने की समस्या बनी हुई है और घरेलू नुस्खे या साधारण दवाइयां खाने के बाद भी कोई राहत नहीं मिल रही है, तो इसे बिल्कुल सामान्य न समझें। जब ट्यूमर का आकार बढ़ने लगता है, तो वह पेट के पाचन तंत्र के मार्ग को बाधित कर देता है, जिससे खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता और बार-बार बदहजमी तथा सीने में जलन की पुरानी समस्या घर कर जाती है।
पेट के कैंसर से पीड़ित मरीजों में सबसे प्रमुख और शुरुआती लक्षणों में से एक है भूख का अचानक पूरी तरह से खत्म हो जाना या खाने की इच्छा न होना। मेडिकल भाषा में इसे एनोरेक्सिया (Anorexia) कहा जाता है। इसके अलावा, मरीजों में एक और अजीब लक्षण देखा जाता है जिसे ‘अर्ली सैटायटी’ (Early Satiety) कहते हैं, यानी थोड़ा सा भोजन या एक-दो निवाला खाते ही ऐसा महसूस होना मानों पेट पूरी तरह से ठस-ठस कर भर गया हो और आगे खाने की बिल्कुल गुंजाइश न बची हो। जब पेट की कोशिकाओं में कैंसर पनपता है, तो वे हॉर्मोन्स और पाचन रस के संतुलन को बिगाड़ देती हैं जिससे व्यक्ति की खाने की भूख स्वाभाविक रूप से मर जाती है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है और आपकी डाइट दिनों-दिन कम होती जा रही है, तो तुरंत सचेत हो जाने की आवश्यकता है।
यदि आपने अपने खान-पान में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया है, न ही कोई जिम ज्वॉइन किया है और न ही वजन घटाने के लिए कोई डाइटिंग या उपाय अपनाए हैं, इसके बावजूद यदि कुछ ही हफ्तों या महीनों में आपका वजन अचानक कई किलो तक कम हो गया है, तो यह शरीर के अंदर किसी गंभीर बीमारी के दस्तक देने का सबसे बड़ा अलार्म है। अचानक और अस्पष्टीकृत वजन घटना (Unexplained Weight Loss) पेट के कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर या अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मेलिग्नेंसी का एक बहुत ही классиcal लक्षण माना जाता है। जब शरीर में कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं, तो वे मेटाबॉलिज्म को अत्यधिक तेज कर देती हैं और शरीर की सारी ऊर्जा व पोषक तत्वों को सोख लेती हैं, जिससे मांसपेशियां तेजी से गलने लगती हैं और व्यक्ति शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और दुबला-पतला होने लगता है।
शुरुआती दौर में पेट का दर्द हल्का हो सकता है, लेकिन जैसे-जैसे कैंसर विकसित होता है, यह दर्द नाभि के ऊपर और पसलियों के नीचे लगातार बना रहने लगता है। कई बार पेट में पानी भरने (Ascites) के कारण पेट हमेशा फूला हुआ और गुब्बारे की तरह टाइट महसूस होता है। इसके अलावा, सबसे खतरनाक और स्पष्ट लक्षणों में से एक है शौच के दौरान मल का रंग पूरी तरह से काला याामारून आना (Melena) या उल्टी में खून के थक्के या कॉफी ग्राउंड जैसे कण दिखाई देना। यह इस बात का संकेत होता है कि पेट के अंदर अल्सर बन चुके हैं और वहां से लगातार ब्लीडिंग हो रही है। यदि आपको मल में इस तरह के बदलाव दिखाई दें, तो एक पल की भी देरी किए बिना गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से मिलकर संपूर्ण एंडोस्कोपी और बायोप्सी की जांच करवानी चाहिए।
पेट के कैंसर के पीछे कई चिकित्सीय और जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में गैस्ट्रिक कैंसर का इतिहास रहा है, जो लोग बहुत ज्यादा स्मोकिंग या शराब का सेवन करते हैं, या जिनके पेट में ‘हेलिकोबैक्टर पाइलोरी’ (H. pylori) नामक बैक्टीरिया का पुराना और गंभीर संक्रमण रहा है, उनमें इस बीमारी के विकसित होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, अत्यधिक मात्रा में प्रोसेस्ड मीट, नमक से संरक्षित खाद्य पदार्थ और डिब्बाबंद चीजें खाने से भी पेट की परतें क्षतिग्रस्त होती हैं। इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए अपनी डाइट में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार और पर्याप्त मात्रा में पानी को शामिल करें। यदि आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण लंबे समय से परेशान कर रहे हैं, तो इंटरनेट पर इलाज ढूंढने के बजाय तुरंत किसी अच्छे स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि समय पर की गई सही जांच और शुरुआती स्टेज में डिटेक्शन ही इस घातक बीमारी को हराने का एकमात्र अचूक उपाय है।
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