
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच एक नए और सनसनीखेज खुलासे ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन (1980 बैच के आईएएस अधिकारी) ने दावा किया है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने साल 2016 में, जब वे एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे, उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर मैदान में उतरने और केंद्रीय मंत्री बनने की पेशकश की थी।
इस दावे के सामने आते ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि पहले सेवारत आईएएस अधिकारी के तौर पर ज्ञानेश कुमार से भाजपा के लिए भर्ती कराई गई और बाद में उन्हें ‘अंपायर’ बनाकर देश के चुनावों की ‘मैच फिक्सिंग’ की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
केरल में ओमन चांडी सरकार के दौरान मुख्य सचिव रहे जिजी थॉमसन ने एक मलयालम समाचार चैनल और मीडिया इंटरव्यू में 2016 की इस बातचीत का ब्योरा साझा किया:
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फ्लाइट के दौरान हुई बातचीत: थॉमसन के अनुसार, यह घटना 2016 की है जब वे और ज्ञानेश कुमार (केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी) एक साथ दिल्ली जा रही फ्लाइट में सफर कर रहे थे। उस समय दोनों अधिकारी सरकारी सेवा में थे।
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रिटायरमेंट प्लान और भाजपा का ऑफर: थॉमसन ने बताया, “उन्होंने मुझसे पूछा कि रिटायरमेंट के बाद मेरी क्या योजनाएं हैं। मैंने कहा कि मेरा कोई विशेष प्लान नहीं है, मैं बच्चों के भविष्य को संवारने से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम करना चाहता हूं। इस पर ज्ञानेश कुमार ने मुझे सलाह दी कि आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प यह होगा कि आप 2019 के आम चुनाव में केरल की पथानामथिट्टा (Pathanamthitta) सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ें, सांसद बनें और फिर कैबिनेट मंत्री बनें।””
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तुरंत ठुकराया प्रस्ताव: जिजी थॉमसन ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया क्योंकि उनकी राजनीति या चुनाव लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक सेवारत सिविल सर्वेंट की तरफ से राजनीतिक टिकट का प्रस्ताव आना हैरान करने वाला था और सरकारी सेवा में राजनीतिक दखलंदाजी की एक सीमा होनी चाहिए।
जिजी थॉमसन के बयान का वीडियो सामने आने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और सीईसी ज्ञानेश कुमार को आड़े हाथों लिया।
राहुल गांधी ने ‘X’ पर लिखा:
“पहले ज्ञानेश कुमार—जो तब एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे—का इस्तेमाल भाजपा के लिए भर्ती (रिक्रूटमेंट) करने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों की मैच-फिक्सिंग का जिम्मा सौंप दिया।””
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी इस मामले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ज्ञानेश कुमार को भाजपा की उम्मीदवारी और मंत्री पद का प्रस्ताव देने का अधिकार किसने दिया था और एक सेवारत अधिकारी किसके इशारे पर राजनीतिक मध्यस्थता कर रहे थे।
यह नया राजनीतिक तूफान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग पहले से ही आंतरिक विवादों और विपक्ष के कड़े निशाने पर है:
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दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट: हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर अपनी असहमति और लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
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चुनाव आयोग का रुख: इन विवादों पर चुनाव आयोग ने शनिवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि आयोग की बैठकों में विचार-विमर्श के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक और स्वस्थ प्रक्रिया है, लेकिन देश भर में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कराने का अंतिम निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
केरल के पूर्व मुख्य सचिव के इस ताज़ा खुलासे ने विपक्ष को चुनाव आयोग की निष्पक्षता और नेतृत्व पर सवाल उठाने का एक और बड़ा हथियार दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और अधिक तेज होना तय माना जा रहा है।
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