न iPhone, न Samsung… ‘ईंट’ जैसा भारी था दुनिया का पहला स्मार्टफोन! बजट और फीचर्स जानकर पकड़ लेंगे सिर

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम हर छोटे-बड़े काम के लिए इस पर निर्भर हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया का सबसे पहला स्मार्टफोन कब आया था? उसे किस कंपनी ने बनाया था और उसका नाम क्या था?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि एप्पल (Apple) के आईफोन या ब्लैकबेरी ने स्मार्टफोन की शुरुआत की थी, लेकिन इतिहास के पन्ने कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। यह बात है 23 नवंबर 1992 की, जब लास वेगास के एक टेक ट्रेड शो में दुनिया के सामने एक ऐसा अनोखा डिवाइस पेश किया गया जिसने भविष्य की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। इस फोन का नाम था— IBM Simon

कैसा था पहला स्मार्टफोन? (Specifications & Features)

उस जमाने के हिसाब से IBM Simon अपने आप में एक बहुत बड़ा अजूबा था। इसने पहली बार एक पारंपरिक मोबाइल फोन को ‘पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट’ (PDA) यानी एक छोटे कंप्यूटर के साथ जोड़ने का काम किया था। इस फोन की मुख्य खासियतों को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

आज हम सैमसंग के अल्ट्रा मॉडल्स या महंगे टैबलेट्स के साथ जिस ‘स्टायलस पेन’ को देखकर हैरान होते हैं, उसकी शुरुआत आईबीएम ने 1992 में ही कर दी थी। बटन न होने की वजह से उस जमाने के यूजर्स को स्क्रीन पर काम करने के लिए काफी ज्यादा जगह मिल जाती थी। जिन कामों को करने के लिए लोगों को कैलकुलेटर, डायरी और घड़ी जैसे पांच अलग-अलग डिवाइस साथ रखने पड़ते थे, वो सब इस एक ‘ईंट’ जैसे भारी-भरकम फोन में सिमट गए थे।

आखिर क्यों इस फोन से जल्दी ही लोगों का मोहभंग हो गया?

भले ही यह तकनीक अपने समय से बहुत आगे थी, लेकिन आम जनता और बिजनेस क्लास के बीच यह फोन बहुत ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सका। इसके फ्लॉप होने के पीछे दो सबसे बड़े कारण थे:

1. सिर्फ एक घंटे की बैटरी लाइफ

IBM Simon की सबसे कमजोर कड़ी इसकी बैटरी थी। यह फोन फुल चार्ज होने के बाद मुश्किल से 1 घंटा ही चल पाता था। यानी अगर आप एक घंटे तक लगातार कॉल पर बात कर लें, ईमेल चेक कर लें या स्केचिंग कर लें, तो फोन तुरंत बंद हो जाता था। कामकाजी और बिजनेस से जुड़े लोगों के लिए इतनी कम बैटरी लाइफ के साथ काम करना बेहद सिरदर्द साबित होने लगा।

2. जेब खाली करने वाली भारी-भरकम कीमत

जब अगस्त 1994 में इस फोन को बेलसाउथ (BellSouth) के जरिए बाजार में उतारा गया, तो दो साल के कॉन्ट्रैक्ट के साथ इसकी कीमत 899 डॉलर तय की गई थी। अगर आज के समय के हिसाब से इसकी वैल्यू का अंदाजा लगाया जाए, तो यह राशि लगभग 85,688 रुपये बैठती है। उस दौर में एक आम इंसान के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च करना मुमकिन नहीं था।

 6 महीने में ही सिमट गया बाजार

खराब बैटरी बैकअप और आसमान छूती कीमत के कारण बाजार में आने के महज 6 महीने के भीतर ही यह फोन गायब हो गया। इस दौरान कंपनी इसके सिर्फ 50,000 यूनिट्स ही बेच सकी थी। इसे सिर्फ वही लोग खरीदते थे जिन्हें नई टेक्नोलॉजी का बहुत ज्यादा शौक था या जो बहुत अमीर थे।

आज के दौर में कहाँ सुरक्षित है यह इतिहास?

अगर आप आज इस ऐतिहासिक फोन को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो आपको लंदन का रुख करना होगा। इस दुनिया के पहले स्मार्टफोन को आज के युवाओं और तकनीक प्रेमियों के लिए लंदन के मशहूर साइंस म्यूजियम (London Science Museum) में बेहद सहेज कर रखा गया है। यह फोन भले ही व्यावसायिक रूप से सफल न रहा हो, लेकिन आज हम जो स्लिम और एडवांस स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी नींव इसी IBM Simon ने रखी थी।