
मैदान पर छूटा एक कैच किस तरह पूरे मैच का नक्शा बदल सकता है और एक मजबूत स्थिति में दिख रही टीम को बैकफुट पर धकेल सकता है, इसका बेहद दर्दनाक और जीवंत नजारा भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे इस सांरास भरे मुकाबले में देखने को मिला। भारतीय क्रिकेट टीम के पास न्यूजीलैंड के आक्रामक मध्यक्रम के बल्लेबाज ग्लेन फिलिप्स को एक बड़े और मैच विनिंग स्कोर तक पहुंचने से पहले ही पवेलियन भेजने का बेहद शानदार मौका था। लेकिन भारतीय फील्डर नमन धीर से मैदान पर हुई एक छोटी सी चूक और कैच ड्रॉप की गलती टीम इंडिया पर बहुत भारी पड़ गई। इस जीवनदान का पूरा फायदा उठाते हुए ग्लेन फिलिप्स ने न केवल भारतीय गेंदबाजों के हौसले पस्त किए, बल्कि महज 107 रनों की एक बेहद विस्फोटक और यादगारी शतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को एक विशाल और सुरक्षित स्कोर तक पहुंचा दिया।
मैच के उस बेहद नाजुक मोड़ पर जब भारतीय गेंदबाज दबाव बना रहे थे और न्यूजीलैंड की रन गति को रोकने की पूरी कोशिश में जुटे थे, तभी ग्लेन फिलिप्स ने बाउंड्री पार करने के इरादे से एक जोखिम भरा हवाई शॉट खेला। गेंद हवा में काफी ऊंची उठी और बाउंड्री लाइन के पास तैनात नमन धीर के पास एक सीधा और आसान सा कैच लपकने का बेहतरीन मौका आया। हालांकि, मैदान पर गलत जजमेंट या आखिरी क्षणों में एकाग्रता टूटने की वजह से गेंद नमन धीर के हाथों से छटककर नीचे गिर गई। उस समय ग्लेन फिलिप्स अपने व्यक्तिगत स्कोर में बेहद कम रनों पर बल्लेबाजी कर रहे थे और यदि वह कैच ले लिया जाता तो कीवी टीम का मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह सकता था। लेकिन इस एक छूटे हुए कैच ने पूरे मैच का रुख न्यूजीलैंड के पक्ष में मोड़ दिया।
मिले जीवनदान का ग्लेन फिलिप्स ने जिस अंदाज में फायदा उठाया, उसने भारतीय खेमे में निराशा की लहर दौड़ा दी। कैच छूटने के बाद फिलिप्स ने अपने तेवर पूरी तरह से बदल लिए और भारतीय स्पिनरों तथा तेज गेंदबाजों पर चौकों और छक्कों की बरसात शुरू कर दी। उन्होंने मैदान के हर कोने में आकर्षक और पॉवरफुल शॉट्स खेले और केवल बाउंड्रीज के दम पर भारतीय गेंदबाजों के लाइन और लेंथ को पूरी तरह से बिगाड़ दिया। देखते ही देखते उन्होंने अपना शतक पूरा किया और 107 रनों की एक ऐतिहासिक पारी खेल डाली। उनकी इस पारी ने यह साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शीर्ष स्तर के बल्लेबाजों को जीवनदान देना कितना घातक और आत्मघाती साबित हो सकता है।
ग्लेन फिलिप्स के क्रीज पर टिक जाने के कारण डैथ ओवर्स में भारतीय गेंदबाजों की सारी रणनीतियां और यॉर्कर फेंकने के प्लान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए। जो भारतीय गेंदबाज शुरुआती स्पेल में बेहद किफायती नजर आ रहे थे, वे अंतिम ओवरों में रन रोकने के लिए जूझते हुए दिखे। फिलिप्स ने दूसरे छोर के बल्लेबाजों के साथ मिलकर एक मजबूत साझेदारी निभाई और टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचा दिया। मैच के बाद क्रिकेट दिग्गजों का भी यही मानना था कि अगर नमन धीर से वह शुरुआती कैच न छूटा होता, तो न्यूजीलैंड की टीम कम से कम 50 से 60 रन कम बनाती और भारत के सामने एक बेहद आसान लक्ष्य होता।
क्रिकेट के खेल में यह पुरानी और मशहूर कहावत है कि ‘कैच विन मैचेस’ यानी कैच पकड़ो और मैच जीतो। नमन धीर की इस एक मानवीय भूल ने भारतीय टीम प्रबंधन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बड़े और हाई-प्रेशर मुकाबलों में फील्डिंग का स्तर कितना मानक होना चाहिए। कैच छूटने के बाद न केवल अतिरिक्त रन बनते हैं बल्कि टीम के मुख्य गेंदबाजों का मनोबल भी गिरता है। अब भारतीय टीम के सामने इस विशाल लक्ष्य का पीछा करने की बहुत बड़ी चुनौती है, जिसके लिए शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को असाधारण प्रदर्शन करना होगा। यह मुकाबला इस बात की सीख देता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक भी ढिलाई पूरे मैच का परिणाम बदल सकती है।
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