
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के विख्यात शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान अर्पित किया है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सरकार द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के नियंत्रण में आने वाले 36 प्रमुख मंदिरों में 1 जनवरी 2024 से 1 अगस्त 2026 के बीच कुल ₹419.88 करोड़ (लगभग ₹420 करोड़) की नकदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई है। सदन में यह आंकड़ा केवल नकद दान का है, जिसमें श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किया गया सोना, चांदी और अन्य आभूषण शामिल नहीं हैं।
बाबा बालक नाथ और नैना देवी मंदिर में बरसी सबसे ज्यादा कृपा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दान संग्रह के मामले में हमीरपुर स्थित उत्तर भारत का प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर (दियोटसिद्ध) सबसे आगे रहा, जहां सर्वाधिक ₹99.19 करोड़ का चढ़ावा दर्ज किया गया। दूसरे स्थान पर बिलासपुर का प्रसिद्ध श्री नयना देवी मंदिर रहा, जहां ₹86.94 करोड़ की राशि भक्तों ने अर्पित की। इसके अलावा ऊना जिले के माता चिंतपूर्णी मंदिर में ₹85.72 करोड़ और कांगड़ा के श्री ज्वालामुखी मंदिर में ₹36.57 करोड़ का चढ़ावा आया। इसके साथ ही बाला सुंदरी, बज्रेश्वरी देवी और शिमला के जाखू हनुमान मंदिर में भी करोड़ों रुपये का दान दर्ज किया गया।
कहां और किन मदों में खर्च किया जाता है मंदिर का फंड
विधानसभा में चढ़ावे की राशि के उपयोग पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया गया कि यह संपूर्ण धनराशि ‘हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था एवं पूर्त विन्यास अधिनियम’ के दिशा-निर्देशों के तहत ही खर्च की जाती है। इस आय का मुख्य उपयोग:
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तीर्थस्थलों के बुनियादी ढांचे के विकास, विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण
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श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, बिजली, सुरक्षा, साफ-सफाई, शौचालय और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार
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निरंतर चलने वाले लंगरों की व्यवस्था, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक मेलों के आयोजन
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मंदिर न्यास के अधीन कार्यरत पुजारियों, सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान
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बेसहारा पशुओं के संरक्षण के लिए गौसदनों के निर्माण, संचालन और संवर्धन में किया जाता है
आपदा राहत में मंदिर फंड के इस्तेमाल पर क्या हैं नियम
सरकार ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर निधि का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदा या सामान्य राहत कार्यों के लिए करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और न ही सरकार ऐसा कोई नया नियम बनाने पर विचार कर रही है। मंदिर का पैसा पूरी तरह से धर्मस्थलों के संरक्षण, धार्मिक गतिविधियों और तीर्थयात्रियों की कल्याणकारी सुविधाओं के लिए ही आरक्षित रखा गया है।
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