
क्रिकेट के आधुनिक और व्यस्त शेड्यूल में जहां दुनिया भर के खिलाड़ी और बड़े-बड़े दिग्गज लगातार बढ़ते वर्कलोड का हवाला देकर आराम की मांग करते नजर आते हैं, वहीं भारतीय टीम के तेज तर्रार गेंदबाज मोहम्मद सिराज का इस मामले में बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला नजरिया सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस दौर में जहां हर कोई थकान और मैच के बोझ से परेशान रहता है, सिराज का यह मानना है कि उन्हें लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना यानी लंबा ब्रेक मिलना बिल्कुल भी रास नहीं आता है और इससे उनका रिदम बिगड़ जाता है। हाल ही में एक दिलचस्प खुलासे के दौरान इस स्टार गेंदबाज ने खुद इस बात से पर्दा उठाया है कि कैसे एक घरेलू मुकाबले के दौरान युवा बल्लेबाज ईशान किशन के हाथों ताबड़तोड़ कुटाई खाने के बाद अचानक उनकी खोई हुई लय वापस लौट आई और वे फिर से अपनी पुरानी फॉर्म में आ गए। खेल के मैदान पर होने वाले संघर्ष और खिलाड़ियों की मानसिकता के इस अनोखे पहलू ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि एक बेहतरीन एथलीट को आराम से ज्यादा मैदान की जंग और पसीना बहाना ही सबसे ज्यादा रास आता है।
आज के समय में जब क्रिकेट बोर्ड्स खिलाड़ियों के शरीर को सुरक्षित रखने के लिए रोटेशन पॉलिसी और वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत उन्हें बीच-बीच में आराम देते हैं, तो अधिकांश खिलाड़ी इस फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन मोहम्मद सिराज उन गेंदबाजों में से हैं जो खुद को तरोताजा रखने के लिए मैदान पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि गेंदबाजी की धार केवल नेट प्रैक्टिस से नहीं बल्कि लगातार मैच खेलने से ही पैनी रहती है। जब उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर बैठना पड़ता है या बिना किसी मैच के लंबा ब्रेक मिलता है, तो उनकी गेंदबाजी की लय प्रभावित होने लगती है, जो उनके प्रदर्शन पर भी असर डालती है। यही कारण है कि वे लगातार क्रिकेट खेलने और हर मुकाबले में अपनी पूरी ताकत झोंकने में विश्वास रखते हैं, भले ही इसके लिए उनके शरीर को कितनी भी कड़ी मेहनत क्यों न करनी पड़े।
हर गेंदबाज के करियर में एक ऐसा पल आता है जब किसी बल्लेबाज के खिलाफ उसकी गेंदबाजी की जमकर धुलाई होती है और वही पल उसकी कमियों को सुधारने का सबसे बड़ा जरिया बन जाता है, और सिराज के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। घरेलू क्रिकेट या प्रैक्टिस सेशन के दौरान जब उनका मुकाबला विस्फोटक बल्लेबाज ईशान किशन से हुआ, तो ईशान ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से उनकी गेंदों की जमकर पिटाई की और मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए। उस क्षण को याद करते हुए सिराज ने खुद खुलासा किया कि वह पिटाई उनके लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल साबित हुई और उसी ने उनकी खोई हुई लय को वापस लाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। जब एक गेंदबाज की गेंदों पर इस तरह से चौकों-छक्कों की बरसात होती है, तो उसके भीतर का छिपा हुआ जज्बा फिर से जाग उठता है और वह अपनी कमियों पर काम करके और अधिक घातक बनकर उभरता है।
इशान किशन के खिलाफ उस मुश्किल सत्र से गुजरने के बाद मोहम्मद सिराज ने जिस तरह से अपनी गेंदबाजी में सुधार किया, उसने मैदान पर उनके खतरनाक रूप को एक बार फिर से दुनिया के सामने लाकर रख दिया। लय वापस मिलने के बाद उन्होंने न केवल अपनी लाइन और लेंथ पर पूरा नियंत्रण पाया बल्कि अपनी गति और स्विंग से बल्लेबाजों को परेशानी में डालना भी शुरू कर दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा खिलाड़ी कभी भी चुनौतियों से घबराता नहीं है, बल्कि अभ्यास के दौरान मिलने वाली मार को भी अपनी ताकत में बदल देता है। उनके इस साहसिक और खुले खुलासे ने यह दिखा दिया कि सिराज खेल को लेकर कितने समर्पित हैं और वे अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने से कभी नहीं हिचकिचाते, जो उन्हें आधुनिक युग के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक बनाता है।
मोहम्मद सिराज का यह अनोखा बयान और उनका काम करने का यह तरीका सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट के गलियारों तक इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहाँ फैंस उनके इस जुझारू रवैये की तारीफ कर रहे हैं। जहां एक तरफ दुनिया भर के खिलाड़ी थकान और वर्कलोड का रोना रोते हैं, वहीं सिराज का यह कहना कि उन्हें लंबे ब्रेक से परेशानी होती है, युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी सीख है कि सफलता का शॉर्टकट केवल मैदान पर लगातार मेहनत करना ही है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दौरान सिराज की यह ऊर्जा और उनकी यह नई लय भारतीय टीम के लिए बेहद फायदेमंद साबित होने वाली है। क्रिकेट के इस लंबे सफर में जब तक इस तरह के जुनूनी खिलाड़ी मैदान पर मौजूद रहेंगे, तब तक खेल का रोमांच हमेशा अपने चरम पर बना रहेगा और हर मुकाबला दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बनता रहेगा।
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