दिल्ली-NCR में CNG ऑटो का दौर खत्म: जानिए कब से बंद होंगे नए रजिस्ट्रेशन और सिर्फ ई-ऑटो का होगा राज

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में जहरीली हवा और हर साल सर्दियों में गहराने वाले वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव होने जा रहा है। कभी प्रदूषण से राहत के लिए सीएनजी (CNG) को सबसे स्वच्छ ईंधन मानकर बढ़ावा दिया गया था, लेकिन अब राजधानी और आसपास के शहरों में सीएनजी ऑटो रिक्शा का दौर धीरे-धीरे समाप्त करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और दिल्ली सरकार की ईवी नीतियों के तहत आने वाले वर्षों में नए सीएनजी ऑटो का पंजीकरण बंद कर केवल 100% इलेक्ट्रिक ऑटो (E-Auto) को ही सड़कों पर उतारने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।

चरणबद्ध तरीके से बंद होंगे सीएनजी ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन

प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार किए गए विस्तृत रोडमैप के अनुसार, यह बदलाव एक झटके में नहीं बल्कि चरणबद्ध (Phased) तरीके से लागू किया जाएगा:

  • दिल्ली में शुरुआत: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सबसे पहले नए सीएनजी ऑटो रिक्शा के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है, जिसके बाद केवल ई-ऑटो के ही नए परमिट और पंजीकरण जारी होंगे।

  • हाई व्हीकल डेंसिटी (HVD) जिले: दिल्ली के बाद एनसीआर के पांच सबसे व्यस्त शहरों—नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत—में सीएनजी ऑटो के नए पंजीकरण को प्रतिबंधित किया जाएगा।

  • शेष एनसीआर क्षेत्र: इसके अगले चरण में एनसीआर के बाकी जिलों (जैसे मेरठ, पानीपत, रोहतक, अलवर आदि) में भी गैर-इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगाकर पूरे रीजन को ई-मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

सीएनजी से ई-ऑटो की तरफ क्यों बढ़ रही है सरकार?

सीएनजी पारंपरिक पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम धुआं छोड़ती है, लेकिन वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों और टेरी (TERI) के अनुसंधानों से स्पष्ट हुआ है कि सीएनजी वाहन भारी मात्रा में नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) का उत्सर्जन करते हैं।

यह नाइट्रोजन ऑक्साइड वातावरण में रासायनिक प्रतिक्रिया कर ‘सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर’ (Secondary PM 2.5) का निर्माण करता है, जो दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों के स्मॉग का 25% से अधिक हिस्सा होता है। इसके अलावा, एनसीआर में कुल वाहनों में थ्री-व्हीलर्स की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन दिनभर सघन चलने और लगातार ईंधन जलने के कारण पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन में इनका अनुपात काफी अधिक रहता है। 100% ई-ऑटो फ्लीट में बदलने से हर साल कई टन हानिकारक कणों के उत्सर्जन में सीधी कमी आएगी।

मौजूदा सीएनजी ऑटो चालकों और परमिट पर क्या असर होगा?

इस नीति को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि क्या सड़कों पर दौड़ रहे सभी मौजूदा सीएनजी ऑटो को तुरंत जब्त या बंद कर दिया जाएगा?

परिवहन विभाग और सीएक्यूएम के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह नियम मुख्य रूप से नए वाहनों के पंजीकरण (New Registrations) पर लागू होगा। जो सीएनजी ऑटो वर्तमान में सड़कों पर वैध परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ चल रहे हैं, वे अपनी 10 से 15 साल की निर्धारित समय-सीमा तक सामान्य रूप से संचालित होते रहेंगे। हालांकि, पुराने और 10 वर्ष पूरे कर चुके ऑटो के रिन्यूअल के समय चालकों को आकर्षक सब्सिडी और स्क्रैपेज इंसेंटिव देकर ई-ऑटो में अपग्रेड करने या रेट्रोफिटिंग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो चालकों के लिए चुनौतियां

ई-ऑटो की इस व्यापक क्रांति को सफल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

  • चार्जिंग व बैटरी स्वैपिंग स्टेशन: दिल्ली और एनसीआर के प्रमुख मेट्रो स्टेशनों, बस टर्मिनलों और ऑटो स्टैंड्स पर फास्ट चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स का तेजी से जाल बिछाया जा रहा है।

  • आर्थिक राहत और कम परिचालन लागत: सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों की तुलना में ई-ऑटो की रनिंग कॉस्ट (प्रति किलोमीटर खर्च) काफी कम है, जिससे लंबी अवधि में ऑटो चालकों की दैनिक कमाई में बढ़ोतरी होगी।

  • सब्सिडी और आसान लोन: दिल्ली सरकार और एनसीआर के संबंधित राज्य नए ई-ऑटो खरीदारों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, रोड टैक्स में छूट और कम ब्याज दरों पर लोन की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

यह बड़ा बदलाव आने वाले कुछ वर्षों में दिल्ली-एनसीआर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को न केवल शांत और आधुनिक बनाएगा, बल्कि करोड़ों नागरिकों को स्वच्छ हवा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।